विजन
राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह (कर्मयोगी सप्ताह) का विजन भारत की विकसित भारत 2047 की यात्रा के अनुरूप भविष्योन्मुखी, नागरिक-केंद्रित और सक्षमता संचालित सिविल सेवा का सृजन करना है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) और कर्मयोगी भारत द्वारा मिशन कर्मयोगी के तहत परिकल्पित है। राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह का उद्देश्य प्रशासन के सभी स्तरों पर जिज्ञासा, नवाचार और सहयोग द्वारा सिविल सेवाओं के भीतर आजीवन सीखने की संस्कृति विकसित करना है।
राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह का विजन भारत के प्रशासन-तंत्र को सीखने की गतिशील व्यवस्था में रूपांतरित करना है जहां प्रत्येक सिविल सेवक चाहे केंद्रीय मंत्रालय, विभाग या स्थानीय निकाय का हो निरंतर प्रोफेशनल विकास मे सक्रिय रूप से संलग्न हो। राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह का लक्ष्य व्यवहारगत, कार्यात्मक एवं क्षेत्र विशेष के कौशलों को सुदृढ़ करना है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सुशासन अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-उन्मुख बने।
राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह की अभिकल्पना “एक सरकार” दृष्टिकोण को लागू करना है जिससे अंतर-मंत्रालय सहयोग एवं साझा शिक्षण स्वामित्व को प्रोत्साहित करना है। निर्मित कोर्सों, वेबीनारों एवं समान संस्थानों के शिक्षण सत्रों के माध्यम से भारतीय प्रज्ञा, आधुनिक सुशासन प्रणालियों और प्रौद्योगिकीय नवाचारों को आगे बढ़ाना है जिससे सिविल सेवक परंपरा और नवाचारों के बीच संतुलन बनाते हुए रूपांतरण कर सकें। इस कार्यक्रम की अभिकल्पना व्यक्तिगत शिक्षण लक्ष्यों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप उद्देश्य को प्राप्त करने में भावना जागृति और भारत के लोक प्रशासन में एकता सुनिश्चित करती है।
इसके विजन की एक अन्य महत्वपूर्ण बात अधिगम्यता एवं समावेशन है। iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म का उपयोग करके राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह सर्वजन के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले सीखने के अवसर उपलब्ध कराता है। इसके तहत विभिन्न स्थानों और संवर्गों के अधिकारी एक स्थान पर सीख सकते हैं। अनेक भाषाओं में विषय सामग्री की उपलब्धता और विभिन्न स्तरों (समूह ए, बी और सी) की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए होने के कारण सरकारी कार्य बल का कोई संवर्ग इससे वंचित नहीं रहा है।
इसका महत्वाकांक्षी विजन एक सप्ताह के प्रयास से कहीं आगे निकलता प्रतीत होता है। इसके द्वारा सरकारी व्यवस्था में सीखने की एक स्थायी संस्कृति विकसित होती दिखाई दे रही है। राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह जैसे कार्यक्रमों के आयोजन और उच्च निष्पादन करने वाले कर्मयोगियों का सम्मान करके सरकार का लक्ष्य निरंतर कौशल उन्नयन को एक प्रोफेशनल मापदंड के तौर पर संस्थापित करने का है।
अंततोगत्वा, राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह का ध्येय एक सक्षम, नैतिक और उत्तरदायी सिविल सेवा विकसित करना है जो आधुनिक प्रशासन की समस्याओं का विश्वास और करुणा के साथ समाधान कर सके और शिक्षण को प्रभावी लोक सेवा एवं राष्ट्रीय रूपांतरण की ताकत बना सके।
उद्देश्य
राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह (कर्मयोगी सप्ताह) की संकल्पना एक राष्ट्रीय अभियान के रूप में की गई है। इसका उद्देश्य भारत की सिविल सेवा के भीतर आजीवन सीखने की संस्कृति विकसित करना और निरंतर प्रोफेशनल विकास को बढ़ावा देना है।
सक्षमताओं को सशक्त बनाना
मुख्य उद्देश्य सरकारी अधिकारियों की व्यवहारगत, कार्यात्मक और क्षेत्रगत आयामों रूपी सक्षमताओं को सशक्त बनाना है। मंत्रालयों और विभागों की वार्षिक क्षमता विकास योजनाओं से जुड़ी अधिगम सामग्री का निर्माण करके राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया कि प्रशिक्षण भूमिका केंद्रित, निष्पादन उन्मुख और प्रभाव संचालित हो।
वन गवर्नमेंट दृष्टिकोण
अन्य प्रमुख उद्देश्य “वन गवर्नमेंट” दृष्टिकोण को बढ़ावा देना था जिससे मंत्रालयों, विभागों और सरकार में विभिन्न स्तरों पर संपर्कहीनता को दूर करना। सहयोगात्मक वेबीनारों, परस्पर क्षेत्रगत विचार विनिमय और साझे शिक्षण प्लेटफॉर्मों के माध्यम से राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह के आयोजन का उद्देश्य लोक प्रशासन के भीतर समूह भावना को विकसित करना और सहयोग बढ़ाना था।
प्रौद्योगिकी एवं प्रज्ञान
इस पहल का उद्देश्य आधुनिक सुशासन के लिए प्रौद्योगिकी एवं भारतीय प्रज्ञान का उपयोग करना भी था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और डेटा संचालित सुशासन जैसे नए साधनों और भारतीय लोकाचार पर आधारित मूल्यों से जोड़कर राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह द्वारा नवाचार, सदाचार और सेवा देने में परानुभूति के बीच संतुलन बनाने पर बल दिया गया।
समान संस्थान शिक्षण एवं पहचान
इसके विजन के केंद्र में समान संस्थान शिक्षण एवं ज्ञान साझा करने को रखा गया। समूह चर्चा एवं विषय आधारित वेबीनारों का आयोजन करके सिविल सेवकों अंतर्दृष्टि विनिमय, श्रेष्ठ व्यवहारों को साझा करने और प्रशासन की वास्तविक चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने पर बल दिया गया। राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह द्वारा शिक्षण उपलब्धियों को सम्मानित करने और उन पर गर्व करके कर्म स्थलों, प्रमाणपत्रों एवं सार्वजनिक सम्मान द्वारा अधिकारियों को प्रेरित किया गया।
इसका उद्देश्य भविष्य में राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह को एक वार्षिक शिक्षण कार्यक्रम के रूप में नियमित रूप से आयोजित करने की शुरूआत करना था। इसे ज्ञान-विनिमय एवं नवाचार के एक स्थायी प्लेटफॉर्म में रूपांतरित करना भी था। इन प्रयासों द्वारा की गई इस पहल का लक्ष्य एक ऐसी सक्षम, सदाचारी एव भविष्योन्मुखी सिविल सेवा तैयार करना था जो निरंतर सुधार और राष्ट्रीय विकास के लिए प्रतिबद्ध हो।
संकल्पना नोट
संकल्पना परिचय
राष्ट्रीय प्रशिक्षण संगोष्ठी 2023 का आयोजन क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) द्वारा किया गया। इसका शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था। यह सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थाओं (सीएसटीआई) का सर्वप्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन था। इसका उद्देश्य सहयोग, ज्ञान साझा करने और भारत के सिविल सेवा प्रशिक्षण-तंत्र के भीतर क्षमता-संवर्धन को बढ़ावा देना था। इसमें 1500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें 1000+ सीएसटीआई, मंत्रालयों, शिक्षा जगत और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल थे। इस संगोष्ठी में प्रशासन और संस्थागत क्षमताओं के संवर्धन की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए मंच प्रदान किया गया।
इस एक दिवसीय कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें उद्घाटन सत्र, विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए आठ सत्र और एनएससीएसटीआई, iGOT एवं नई प्रौद्योगिकियों पर अनेक ज्ञानशालाओं का आयोजन किया गया। मुख्य विषयों में प्रशिक्षण-आवश्यकताओं का आकलन करना, ज्ञान साझा करना, प्रभाव-मूल्यांकन, रणनीतिक संसाधन योजना बनाना, संकाय-विकास और डिजिटल रूपांतरण शामिल थे। इन सत्रों की अनुशंसाओं से आयोग की भावी नीति और संस्थागत पहलों को दिशा मिलेगी।
इस संगोष्ठी का समापन माननीय राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव द्वारा किया गया। इन्होंने अपने संबोधनों में भविष्य के कदमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें व्यवहार और प्रौद्योगिकी-संचालित क्षमता निर्माण, संस्थागत सहयोग और कान्क्लेव का नियमित आयोजन करने पर बल दिया गया जिससे भारत की strong class="karmayogi-highlight">भविष्योन्मुखी सिविल सेवा को सशक्त किया जा सके।
विकास-क्रम (प्रायोगिक/चरण)
प्रमुख उपलब्धियां
प्रभाव का आकलन (प्राप्त परिणाम, आकलन योग्य संकेतक)
प्रमुख निष्पादन संकेतक
- कर्मयोगी सप्ताह 2024 के दौरान प्रतिदिन औसतन 3.5 लाख सहभागियों ने कोर्स पूरे किए जबकि 6.2 लाख+ कार्मिकों को 24 अक्तूबर 2024 तक इससे जोड़ा गया।
- राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह के दौरान 7.4 लाख+ सिविल सेवकों की सक्रिय सहभागिता देखी गई (कुछ व्यक्तिगत सहभागिता ऑफलाइन वर्कशॉप या सामूहिक रूप से शामिल वेबीनारों के माध्यम से हुई) जिसका पता लगाया जा सकता है। इनमें से 4.2 लाख+ सहभागियोंने लक्षित न्यूनतम 4 घंटे का प्रशिक्षण पूरा किया।
- कर्मयोगी सप्ताह की उल्लेखनीय बात यह रही कि केंद्रीय वेबीनारों का श्रृंखलाबद्ध आयोजन किया गया और इनमें विविध क्षेत्रों के 24 प्रमुख वक्ताओं ने संबोधित किया जिनका चयन उनके विशेषज्ञता क्षेत्र से किया गया जिसका सुशासन और लोक प्रशासन पर सीधा प्रभाव होगा।
- कर्मयोगी सप्ताह के दौरान आयोजित सामूहिक चर्चाओं की मुख्य विशेषता यह रही कि इनमें सिविल सेवकों को एक मंच मिला जिससे वे सार्थक संवाद, अपने अनुभव साझा करने और सहयोगात्मक प्रशिक्षण के लिए जुड़ सके।
- लोकसंपर्क: कर्मयोगी सप्ताह की बड़ी उपलब्धि यह रही कि इस दौरान कुल मिलाकर 1.74 करोड़ व्यूअर्स तक पहुंचा गया जो एक बड़ी संख्या है। साथ ही, सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर इस दौरान व्यापक ध्यानाकर्षण दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर 57,800 संवादऔर 691 पोस्ट/लेख आने से इस कार्य़क्रम से बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा जा सका और सार्थक बातचीत को बल मिला।
निष्पादन विश्लेषिकी
दैनिक कोर्स पूर्ति रुझान
कोर्स पूर्ति और प्रशिक्षण आकलन
केंद्रीय वेबीनार निष्पादन
मंत्रालय/विभाग विशिष्ट वेबीनार निष्पादन
वेबीनार निष्पादन सांख्यिकी
कुल सांख्यिकी विहंगावलोकन
राष्ट्रीय प्रशिक्षण संगोष्ठी से संबंध
राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह (एनएलडब्ल्यू) और राष्ट्रीय प्रशिक्षण संगोष्ठी मिशन कर्मयोगी के तहत पूरक पहल हैं दोनों भारत के सिविल सेवा तंत्र के रूपांतरण के साझे विजन के लिए काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय प्रशिक्षण संगोष्ठी 2023 ने प्रशिक्षण संस्थाओं को साथ लाने और मानक स्थापित करने (एनएससीएसटीआई) की बुनियाद रखी तो राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह 2024 में प्रत्येक सिविल सेवक को सक्षमता आधारित प्रशिक्षण देने के लिए इन फ्रेमवर्क को परिचालित किया गया।
एनटीसी का फोकस संस्थागत सशक्तिकरण – मानक सृजन, प्रशिक्षण संस्थाओं के क्षमता विकास और सीएसटीआई में सहयोग बढ़ाने पर रहा। एनएलडब्ल्यू का दूसरी ओर व्यक्तिगत और संस्थागत प्रशिक्षण संस्कृति विकसित करने – सिविल सेवकों को अपनी प्रशिक्षण यात्रा की जिम्मेदारी लेने के लिए उत्साहित करने और निरंतर क्षमता विकास को प्रोफेशनल मानदंड के रूप में अपनाने पर फोकस रहा।
इन पहलों से मिलकर एक व्यापक तंत्र सृजित हुआ जहां प्रशिक्षण संस्थाओं को सशक्त (एनटीसी) बनाया गया और प्रशिक्षणार्थियों को प्रेरित कर समर्थ (एनएलडब्ल्यू) बनाया गया। साथ ही यह सुनिश्चित भी किया गया कि क्षमता विकास संस्थापित और वैयक्तिकृत हो जिससे विकसित भारत 2047 के अनुरूप भविष्योन्मुखी सिविल सेवा का मार्ग प्रशस्त हो।
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