विजन
राष्ट्रीय प्रशिक्षण संगोष्ठी (एनटीसी) का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 11 जून 2023 को किया गया। क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) की यह भारतीय सिविल सेवा प्रशिक्षण-तंत्र के सशक्तिकरण की एक युग-प्रवर्तक पहल है। इसका उद्देश्य 1000+ केंद्रीय और राज्य सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थाओं (सीएसटीआई), वरिष्ठ सरकारी अधिकारियो, अकादमिकों और नॉलेज पार्टनरों को सहयोग, ज्ञान विनिमय और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए एक साझे मंच पर लाना है।
एनटीसी का मुख्य ध्येय एक भविष्योन्मुखी सिविल सेवा बनाना था जो विकसित भारत@2047 के अनुरूप भारत के रूपांतरण को दिशा देने में समर्थ हो। इस संगोष्ठी में प्रशिक्षण की भिन्न-भिन्न पद्धतियों के स्थान पर “संपूर्ण सरकारी” और “संपूर्ण व्यवस्था” प्रशिक्षण-तंत्र पर लाने की आवश्यकता पर बल दिया गया जहां क्षमता-विकास अनवरत, सक्षमता संचालित और प्रौद्योगिकी- समर्थ हो जाता है।
8 विषयगत विभिन्न सत्रों के द्वारा एनटीसी का फोकस प्रमुख क्षेत्रों , प्रशिक्षण आवश्यकताओं का आकलन, ज्ञान साझा करना, प्रभाव मूल्यांकन, रणनीतिक संसाधन योजना, संकाय विकास, फिजिटल रूपांतरण, प्रशासन की चुनौतियों और सक्षमता आधारित क्षमता-विकास पर बल देकर प्रशिक्षण संस्थाओं के आधार को मजबूत करना है। इन चर्चाओं को सीएसटीआई की संस्था स्तरीय एवं नीति-स्तरीय प्रशिक्षणों की पहचान करने में सहायता करने के लिए डिजाइन किया गया था जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रभाव को बढ़ाया जा सके।
विजन का अन्य प्रमुख तत्व था राष्ट्रीय सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्था मानकों (एनएससीएसटीआई) द्वारा सीएसटीआई में गुणवत्ता और संस्थागत उत्कृष्टता का मानकीकरण करना। ये मानक संगोष्ठी के दौरान प्रवर्तित और परिचालित किए गए थे। इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य भारत की प्रशिक्षण संस्थाओं को वैश्विक बेंचमार्क के अनुरूप बनाना और नैतिक, सक्षम एवं नागरिक-केंद्रित सिविल सेवकों को तैयार करने मे समर्थ बनाना था।
एनटीसी का लक्ष्य प्रौद्योगिकी मंचों के माध्यम से नवाचार एवं सहयोग को बढ़ावा देना भी था। इन मंचों में iGOT कर्मयोगी मंच और नए तकनीकी मंच भी शामिल थे। साथ ही डिजिटल साधनों एवं गहन प्रशिक्षण प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन भी किया गया।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय प्रशिक्षण संगोष्ठी की परिकल्पना में रूपांतरित, परस्पर संबद्ध और अंगीकरणीय प्रशिक्षण तंत्र – एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें लोक सेवकों के कौशलों, मानसिकता और नेतृत्व-क्षमता का निरंतर उन्नयन किया जाता है, सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों को संस्थापित किया जाता है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रशिक्षण को नागरिकों के लिए मूर्त प्रशासन परिणामों में परिवर्तित किया जाए।
उद्देश्य
- सीएसटीआई में सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों और नवाचारों के साझा करने के लिए सरलता से सहयोग और नेटवर्किंग की जा सके।
- गुणवत्ता बेंचमार्किंग के लिए राष्ट्रीय सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्था मानक (एनएससीएसटीआई) के शुरू और परिचालित किया जाए।
- संस्थागत और प्रशिक्षण निष्पादन में सुधार लाने के लिए 8 विभिन्न सत्रों की कार्रवाई योग्य रणनीतियों की पहचान करना।
- फिजिटल प्रशिक्षण के लिए डिजिटल साधनों विशेषकर iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के बारे में जानकारी बढ़ाकर इसका अधिक अंगीकरण सुनिश्चित करना।
- राष्ट्रीय प्रशिक्षण संगोष्ठी का ज्ञान विनिमय और सुधार के एक आवर्ती प्लेटफॉर्म के रूप में संस्थापना करना।
- भविष्योन्मुखी सिविल सेवा के मिशन कर्मयोगी के विजन के अनुरूप विश्व-स्तरीय प्रशिक्षण-तंत्र के रूप में सृजन करना।
- सभी सरकारी संस्थाओं में सक्षमता आधारित, प्रौद्योगिकी संचालित और नागरिक केंद्रित प्रशिक्षण मॉडलों को आगे बढ़ाना।
- राष्ट्रव्यापी एनएससीएसटीआई मानकीकरण प्राप्त करने और सीएसटीआई की क्षमता को उत्कृष्टता के 8 स्तंभों पर विकसित करना।
- सरकारी व्यवस्थाओं में निरंतर प्रशिक्षण, सहयोग और व्यवहार रूपांतरण लाना।
संकल्पना नोट
संकल्पना परिचय
राष्ट्रीय प्रशिक्षण संगोष्ठी 2023 मिशन कर्मयोगी के तहत क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) द्वारा आयोजित की गई जो केंद्रीय एवं राज्य प्रशिक्षण संस्था (सीएसटीआई) में सहयोग बढ़ाने और विकसित भारत@2047 के विजन के साथ क्षमता विकास के प्रयासों के अनुरूप सशक्त बनाने के एक राष्ट्रव्यापी प्लेटफॉर्म के रूप में परिकल्पित की गई। इस संगोष्ठी का उद्देश्य तालमेल, नवाचार और संस्थाओं में मानकीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण-तंत्र का रूपांतरण करना था।
इसके द्वारा 1000 प्रशिक्षण संस्थाओं और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को साथ लाकर सक्षमता-आधारित डिजाइन, प्रौद्योगिकी संयोजन, प्रभाव मूल्यांकन और प्रशासनिक सुधारों द्वारा प्रशिक्षण की गुणवत्ता मे सुधार लाने के लिए चर्चा की गई। मुख्य फोकस राष्ट्रीय सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्था मानक (एनएससीएसटीआई) की शुरुआत और अंगीकरण करने पर रहा। एनएससीएसटीआई एक ऐसा फ्रेमवर्क है जो सीएसटीआई में गुणवत्ता बेंचमार्किंग और संस्थागत उत्कृष्टता सुनिश्चित करता है।
संगोष्ठी के आठ विषयों पर अलग-अलग सत्रों मे iGOT कर्मयोगी, डेटा-संचालित प्रशासन और संस्थागत सहयोग द्वारा डिजिटल रूपांतरण पर बल देकर कार्रवाई योग्य सुधार के उपायों पर चर्चा की गई।
कुल मिलाकर, एनटीसी की परिकल्पना साझे प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी और क्षमता संवर्धन द्वारा लोक सेवा प्रशिक्षण, निरंतर प्रशिक्षण के संस्थानीकरण और भविष्योन्मुखी, नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा विकसित करने के एक माध्यम से रूप में की गई थी।
विकास-क्रम (प्रायोगिक/चरण)
प्रमुख उपलब्धियां
माननीय प्रधानमंत्री द्वारा शुभारंभ (11 जून 2023)
- राष्ट्रीय सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्था मानक (एनएससीएसटीआई) फ्रेमवर्क का शुभारंभ।
- एनएससीएसटीआई में पीएम डैशबोर्ड का लोकार्पण .
- एनएससीएसटीआई मानकीकरण प्रमाणपत्रों का तीन केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थाओं – एनएडीटी, एसवीपीएनपीए और एनआईसीएफ को वितरण
- माननीय प्रधानमंत्री का संबोधन जिसमें भविष्योन्मुखी सिविल सेवकों और विकसित भारत@2047 के विजन की मुख्य-मुख्य बातों को वर्णन।
आरंभिक सत्र (माननीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में)
- एनएससीएसटीआई मानकीकरण प्रमाणपत्रों का सात अतिरिक्त सीएसटीआई को वितरण।
- अध्यक्ष, सीबीसी द्वारा एसीएसटीआई के सीबीसी विजन का प्रस्तुतिकरण।
- एनएससीएसटीआई के लिए कॉपीराइट सर्टिफिकेट का शुभारंभ।
- सीबीसी सदस्यों एवं सीईओ, कर्मयोगी भारत द्वारा संकाय विकास, iGOT प्लेटफॉर्म और एनएससीएसटीआई फ्रेमवर्क पर प्रस्तुतिकरण।
विविध सत्र (8 विषयों पर पैनल चर्चा)
क्षमता-विकास के प्रमुख विषयों पर चर्चा:
- प्रशिक्षण आवश्यकताएं और कोर्स डिजाइन
- ज्ञान साझा करना
- प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन
- रणनीतिक संसाधन योजना
- संकाय क्षमता संवर्धन
- फिजिटल रूपांतरण
- सुशासन की चुनौतियां का सामना करना
- सिविल सेवा अधिकारियों के लिए सक्षमताएं
लाउंज संस्थापनाएं
- एनएससीएसटीआई लाउंज – मानकीकरण मार्गदर्शन और प्रक्रिया सहायता।
- iGOT लाउंज – प्लेटफॉर्म अभ्यासीकरण और डिजिटल कोर्स सृजन।
- नवीन प्रौद्योगिकी लाउंज – एआर/वीआर का प्रदर्शन और एआई आधारित प्रशिक्षण साधन।
- इंटरव्यू लाउंज – हितधारकों की अंतर्दृष्टि और अनुभव जानना।
समापन कार्यक्रम
- माननीय राज्य मंत्री और पीएम के प्रधान सचिव के समक्ष विविध सत्रों की प्रमुख अनुशंसाओं का प्रस्तुतिकरण।
- Aडॉ. पी. के. मिश्रा द्वारा संबोधन में संपूर्ण प्रशिक्षण एवं प्रौद्योगिकीय अंगीकरण पर बल।
- डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा समापन संबोधन जिसमें संकाय विकास, व्यवहारगत प्रशिक्षण एवं पीपीपी मॉडलों का प्रमुखता से उल्लेख।
संगोष्ठी पश्चात रणनीति (भविष्य की योजना)
- सीबीसी की नीति और संस्थागत पहलों में पैनल अनुशंसाओं को शामिल करना।
- एनएससीएसटीआई मानकीकरण और क्षमता विकास कार्यक्रमों का विस्तार करना।
- एनटीसी संस्थानीकरण जिसमें इसे सिविल सेवा प्रशिक्षण में सहयोग, प्रशिक्षण और नवाचार के लिए आवर्ती प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जाएगा।
प्रभाव मेट्रिक्स (परिणाम प्राप्ति, आकलन योग्य संकेतक)
प्रमुख परिणाम
- संगोष्ठी में 1500-1900 से अधिक प्रतिनिधियोंको सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थाओं (सीएसटीआई) से साथ लाया गया। इनमें केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान, राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान, आंचलिक/क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान और अनुसंधान संस्थान शामिल थे।
- आठ विषयों पर पैनल चर्चा प्रमुख क्षेत्रों को शामिलकर आयोजित की गई: इनमें प्रशिक्षण आवश्यकताओं का आकलन, प्रशिक्षण को कोर्स डिजाइन से जोड़ना, संकाय विकास, प्रशिक्षण-प्रभाव आकलन, विषयवस्तु डिजिटलीकरण, रणनीतिक संसाधन योजना, क्षमता-संवर्धन और क्षमता विकास जगत में “फिजिटल” (प्रत्यक्ष+डिजिटल) में विकास।
- विषमस्तरीय और समस्तरीय सुरक्षित परिवेश से बाहर निकलने पर बल जिसमें “संपूर्ण सरकार”मानसिकता को सिविल सेवकों में प्रोत्साहित करना और नागरिक-सहभागिता (जन भागीदारी) बढ़ाना।
- इस बात को समझना कि प्रशिक्षण कोई “दंडस्वरूप तैनाती” नहीं है बल्कि करियर विकास और सुशासन प्रभावशीलता का एक प्रमुख भाग है।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म का महत्व – इसमें 10 लाख (1 मिलियन) से अधिक प्रयोक्ताओं का पंजीकरण हो चुका है – इसे सरकारी कार्मिकों के “किसी भी समय, कहीं पर भी, किसी भी साधन” प्रशिक्षण के लिए समर्थ बनाने वाले के रूप में प्रमुखता दी जाती रही है।
- संगोष्ठी की अनुशंसाओं को एक रिपोर्ट के रूप में संकलित किया गया है जिसमें सीएसटीआई के लिए कार्रवाई योग्य रणनीतियों के रूप में रेखांकित किया गया है। इनमें बेहतर प्रशिक्षण आवश्कताओं के आकलन, कोर्स डिजाइन को सक्षमताओं से जोड़ना और साझे संसाधनों की ओर मुड़ना तथा प्रशिक्षण संस्थाओं (राष्ट्रीय सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्था मानक – एनएससीएसटीआई) के मानकीकरण को शामिल किया गया है।
व्यापक प्रभाव
- प्रशिक्षण अवसंरचना को मजबूत बनाना: यह संगोष्ठी भविष्योन्मुखी कौशलों और सुशासन की आवश्यकताओं के अनुरूप पूरे भारत के सिविल सेवकों के प्रशिक्षण संस्थाओं के आधुनिकीकरण और उन्नयन की दिशा में एक कदम है।
- समान संस्थाओं के प्रशिक्षण एवं सहयोग का सांस्थानीकरण: बहुविध प्रशिक्षण संस्थानों, राज्य/स्थानीय सरकारी अधिकारियों और निजी क्षेत्र विशेषज्ञों की सहभागिता से यह कार्यक्रम परस्पर प्रशिक्षण और सर्वश्रेष्ठ व्यवहारों को साझा करने का एक मंच बन गया है।
- सेवा उन्मुख मानसिकता का समावेश: “जिम्मेदारी” “नागरिक सेवा” और पद से ऊपर उठकर काम, इस संगोष्ठी से सरकारी सेवा के बारे में अवधारणा में परिवर्तन देखा गया, यह न केवल तकनीकी कौशलों में, बल्कि मानसिकता, दृष्टिकोण और सुशासन संस्कृति के रूप में दिखाई दिया।
- डिजिटल सर्वप्रथम और सक्षमता आधारित प्रशिक्षण: डिजिटलीकरण, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण-प्रभाव आकलन और सक्षमताओं को जोड़ने पर चर्चा से पारंपरिक क्लासरूम केंद्रित प्रशिक्षण से विविधीकृत, प्रौद्योगिकी समर्थ, परिणामोन्मुखी क्षमता विकास की ओर परिवर्तन का पता चलता है।
राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह से संबंध
राष्ट्रीय प्रशिक्षण संगोष्ठी (एनटीसी) और राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह (एनएलडब्ल्यू) मिशन कर्मयोगी की पूरक पहल है। दोनों ही भारत के सिविल सेवा प्रशिक्षण-तंत्र के रूपांतरण के साझा विजन की दिशा में काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय प्रशिक्षण संगोष्ठी 2023 द्वारा प्रशिक्षण संस्थाओं को साथ लाकर और मानक स्थापित करके (एनएससीएसटीआई) की आधार शिला रखी है। राष्ट्रीय अधिगम सप्ताह 2024 के अंतर्गत सक्षमता-आधारित प्रशिक्षण में प्रत्येक सिविल सेवक को जोड़कर इन फ्रेमवर्क को लागू किया गया।
एनटीसी का फोकस संस्थागत सशक्तिकरण पर रहा – इसमें मानक बनाने, प्रशिक्षण संस्थाओं के क्षमता विकास और सीएसटीआई में सहयोग बढ़ाने पर बल रहा। दूसरी ओर एनएलडब्ल्यू का फोकस व्यक्तिगत एवं संगठनात्मक प्रशिक्षण संस्कृति पर रहा – इसमें सिविल सेवकों का अपनी प्रशिक्षण यात्रा में जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए उत्साहवर्धन किया गया और निरंतर विकास को एक प्रोफेशनल मानदंड के रूप में स्थापित किया गया।
इन पहलों से एक व्यापक तंत्र सृजित हुआ जिसमें प्रशिक्षण संस्थाओं को मजबूत बनाया जा रहा है (एनटीसी) और प्रशिक्षणार्थियों को प्रेरित किया गया और समर्थ बनाया गया (एनएलडब्ल्यू)। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया कि क्षमता विकास संस्थागत और वैयक्तिकृत हो जाए जिससे विकसित भारत 2047 के अनुरूप सिविल सेवा भविष्योन्मुखी बन सके।
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मीडिया एसेट्स
Resources
राष्ट्रीय प्रशिक्षण संगोष्ठी 2023 के सभी मीडिया एसेट्स और संसाधन एक अलग माइक्रोसाइट पर निम्नानुसार उपलब्ध हैं:
https://cbc.gov.in/cbc-ntc2023/