Capacity Building Commission

अमृत ज्ञान कोश पहल

उच्च स्तरीय प्रकरण लेखन कार्यशाला / दिसंबर 2024 और सितंबर 2025

अमृत ज्ञान कोश पहल के तहत उच्च स्तरीय प्रकरण लेखन एवं शिक्षण कार्यक्रम – स्टैनफोर्ड लीडरशिप एकेडमी फॉर डेवल्पमेंट, एशियाई विकास बैंक भारत और एशियाई विकास बैंक संस्थान के सहयोग से क्षमता विकास आयोग की एक पहल

प्रस्तावना: प्रकरण लेखन लोक प्रशासन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है

लोक सेवकों को प्राय: जटिल परिवेश में कार्य करना होता है जहां समझौताकारी समन्वयन करना होता है, अनेक बाधाओं और संस्थागत वास्तविकताओं का सामना करना पड़ता है। प्रकरण लेखन द्वारा इन परिवर्तनों को प्रत्यक्षतया लिपिबद्ध किया जा सकता है। इसके अंतर्गत यह सब लिखित रूप में प्रस्तुत किया जाता है कि कैसे निर्णय लिए जाते हैं, कौन-कौन सी चुनौतियों सामने आती हैं, क्यों कतिपय कार्रवाई करनी पड़ती है और अन्य इनसे क्या सीख ले सकते हैं।

अमृत ज्ञान कोश (एजीके) पहल के तहत क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) केंद्रीय एवं राज्य प्रशिक्षण संस्थानों (सीटीआई एवं एटीआई) के संकाय को प्रशिक्षण द्वारा प्रकरण-आधारित लेखन सीखने के लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षण-तंत्र विकसित कर रहा है जिससे उच्च स्तरीय सुशासन प्रकरण अध्ययन (केस स्टडीज़) लिखवाए, सिखाए और समझाए जा सकें।

उच्चस्तरीय प्रकरण लेखन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य

दोनों संस्करणों मे इस कार्यक्रम के उद्देश्य निम्नानुसार हैं:

  • सीटीआई एवं एटीआई संकाय में प्रभावशाली प्रकरण-लेखन कौशल विकसित करना।
  • एजीके और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सिखावटी उपयोग के लिए सुरचित प्रकरण अध्ययन (केस स्टडीज़) और प्रशिक्षण नोट तैयार करना।
  • वैश्विक मानकों पर आधारित प्रकरण-शिक्षण प्रशिक्षण को सशक्त बनाना।
  • दक्ष प्रशिक्षकों का एक संवर्ग तैयार करना जो भविष्य में प्रशिक्षणार्थियों को परामर्श देने में समर्थ हों।
  • राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप भारत के उच्च गुणवत्ता वाले सुशासन प्रकरण संग्रह को समृद्ध करना।

इन उद्देश्यों को ध्यान में रखकर दोनों दिसंबर 2024 संस्करण और सितंबर 2025 संस्करण में मार्गदर्शन किया गया जिससे यह एक सुसंगत, बहुवर्षीय क्षमता-विकास प्रयास बन पाया।

चयन प्रक्रिया: एक कड़ी बहु-स्तरीय पद्धति

बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया

दोनों कार्यशालाओं में एक बात समान रही कि गुणवत्ता और अभिप्रेरण पर बहुत बल दिया गया। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित शामिल थे:

  1. सीटीआई एवं एटीआई द्वारा संकाय का संस्थागत नामांकन किया गया।
  2. अभिमुखीकरण एवं प्रकरण लेखन पर परिचायक प्रशिक्षण मॉड्यूल।
  3. क्वालिफाइंग क्विज जिसमें आगे जाने के लिए न्यूनतम अंक प्राप्त करना आवश्यक था।
  4. 2 पृष्ठीय प्रकरण प्रस्ताव की प्रस्तुति।
  5. स्पष्टता, सुसंगतता एवं सीखने के भविष्य में मूल्य के आधार पर प्रस्तावों का मूल्यांकन किया गया।

दोनों संस्करणों में केंद्रीय और राज्य प्रशिक्षण संस्थानों की प्रतिक्रिया प्रभावपूर्ण रही। दोनों कार्यशालाओं के लिए सीटीआई और एटीआई से 450 से अधिकनामांकन प्राप्त हुए। इससे प्रकरण-आधारित प्रशिक्षण के प्रति राष्ट्रव्यापी रुचि के बढ़ने का पता चलता है।

इनमें से 135 संकाय सदस्यों का बहुस्तरीय कड़ी स्क्रीनिंग प्रक्रिया द्वारा चयन किया गया था। इस प्रकार एजीके उच्च स्तरीय प्रकरण लेखन कार्यशाला सुशासन प्रकरण लेखन का भारत के सर्वाधिक विस्तृत एवं प्रतिस्पर्धी क्षमता विकास के प्रयासों में शुमार हुआ।

दोनों कार्यशालाओं की कार्यक्रम संरचना

दोनों कार्यशालाओं में विश्व भर के विशेषज्ञों द्वारा सुनियोजित परामर्श दिया गया जिससे स्थायी सामर्थ्य सृजन सुनिश्चित हो सके। दोनों संस्करणों की प्रमुख विषयवस्तु में निम्नलिखित का समावेश रहा:

चरण 1: कार्यशाला पूर्व प्रशिक्षण
  • नामांकित संकाय के लिए अभिमुखीकरण सत्र
  • प्रकरण लेखन और मूल्यांकनकारी प्रश्नोत्तरी पर परिचायक वीडियो मॉड्यूल
  • ब्योरेवार प्रकरण प्रस्ताव की प्रस्तुति
चरण 2: व्यक्तिपरक कार्यशाला
  • दिसंबर 2024 : प्रशिक्षणार्थियों के लिए दिल्ली में 5 दिन के दो सत्र
  • सितंबर 2025: तीन क्षेत्रीय 3 दिवसीय कार्यशालाएं (प्रत्येक प्रशिक्षण सत्र में 25 सहभागी)
  • प्रकरण-संरचना, साक्षात्कार-कौशल और प्रशिक्षण-पद्धतियों पर फोकस
चरण 3: कार्यशाला पश्चात परामर्श
  • संकाय परामर्शदाताओं से निरंतर लेखन सहायता
  • मसौदों को निखारने के लिए प्रशिक्षकों के साथ वर्चुअल सत्र
  • अंतिम प्रकाशन समीक्षा और संपादन सहायता

प्रशिक्षक एवं परामर्शदाता: वैश्विक विशेषज्ञता, भारतीय नेतृत्व

स्टैनफर्ड एलएडी एवं आईआईटी दिल्ली से प्रमुख प्रशिक्षक

  • प्रो. आर. केंट वीवर, जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी एंड स्टैनफर्ड एलएडी
  • श्री बलेयर कैमरून, संकाय, स्टैनफर्ड एलएडी
  • डॉ. दिंशा मिस्त्री, हूवर इंस्टीट्यूशन, स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी
  • डॉ. संजय धीर, प्रोफेसर, प्रबंध अध्ययन विभाग, आईआईटी दिल्ली
  • डॉ. के. ई. सीताराम, सीनियर कन्सल्टिंग स्पेशलिस्ट, एडीबीआई

सहभागियों का अनुभव एवं प्रतिक्रिया

100%द्वारा प्रतिक्रिया 

देते हुए कहा गया कि वे सहकर्मियों को यह कार्यशाला सुझाएंगे

4.8/5 समग्र रेटिंग 

इस कार्यक्रम को सहभागियों से उत्कृष्ट रेटिंग प्राप्त हुई

सहभागियों द्वारा सत्रों की स्पष्टता, गहनता और व्यावहारिक संबद्धता की सराहना की गई। कई सहभागियों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षकों और भारतीय संकाय परामर्शदाताओं की उपस्थिति को महत्वपूर्ण बताया।

अनुभवी प्रशिक्षक संवर्ग का सृजन और क्षमता विस्तार

अनुभवी प्रशिक्षकों के एक संवर्ग का सृजन

इस कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धि रही कार्यशाला के प्रमुख सहभागियों में से अनुभवी प्रशिक्षकों का एक समूह तैयार किया गया।

  • दिसंबर 2024 की कार्यशाला से 10 सहभागियों को चुना गया जिन्हें सितंबर 2025 में होने वाली कार्यशाला के सहभागियों के परामर्श देना था
  • ये प्रशिक्षक देश भर के नए सहभागियों को परामर्श देंगे
  • उन्होंने सितंबर 2025 के प्रशिक्षण सत्रों में सहयोग किया
  • उन्होंने पाठ्यक्रम में प्रकरण आधारित प्रशिक्षण को शामिल करने में संस्थान की सहायता की

दोनों संस्करणों में बड़ी संख्या में विभिन्न स्थानों से सहभागिता

350+ संकाय
को नामांकन एवं ऑनलाइन मॉड्यूल के माध्यम से जोड़ा गया
60 संकाय
दिसंबर 2024 में व्यक्तिश: प्रशिक्षित किए गए
75 संकाय
सितंबर 2025 में प्रशिक्षित किए गए
अंतर्राष्ट्रीय मान्यता
चुनिंदा प्रकरण टोक्यो में एडीबीआई के साथ सह-प्रकाशित किए गए

दोनों कार्यशालाओं से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्षमता विस्तार के कार्य को गति मिली। इन कार्यशालाओं में दर्जन से अधिक परामर्शदाताओं एवं प्रशिक्षकों ने योगदान किया। इस कारण एजीके प्रकरण लेखन कार्यक्रम का भारत के प्रकरण आधारित प्रशिक्षण के सर्वाधिक विस्तृत क्षमता विकास के प्रयासों में शुमार हुआ।

भविष्य की योजना: भारत की सुशासन ज्ञान अवसंरचना को विकसित करना

भविष्य दृष्टि

उच्चस्तरीय प्रकरण लेखन और प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से क्षमता विकास आयोग भारत के अपने सुशासन ज्ञान को आकार देने, परिरक्षित करने और प्रसारित करने में समर्थ बना रहा है। इन कार्यशालाओं के द्वारा प्रज्ञान आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है, प्रशिक्षण-पद्धतियों को बेहतर बनाया जा रहा है और मिशन कर्मयोगी के एक समर्थवान, विश्वस्त और भविष्य के लिए तैयार सिविल सेवा बनाने के लक्ष्य को बल मिल रहा है।

As अमृत ज्ञान कोश के बढ़ने के साथ साथ उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय लोक प्रशासन प्रकरण निरंतर तैयार हो रहे हैं, अकादमिक अनुसंधान एवं प्रशासन की वास्तविक् समस्याओं के समाधान खोजने के प्रयासों को पहचान मिल रही है।