Capacity Building Commission

प्रशिक्षण संस्थाओं का मानकीकरण एवं गुणवत्ता उन्नयन

मानकीकरण एवं गुणवत्ता उन्नयन कार्यक्रम (क्यूआईपीएस)

क्षमता विकास संस्थाओं के लिए व्यापक मानकीकरण फ्रेमवर्क एवं गुणवत्ता उन्नयन कार्यक्रम

विजन

राष्ट्रीय सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्था मानक (एनएससीएसटीआई) एक विश्वस्तरीय प्रशिक्षण-तंत्र है जो भारत की सिविल सेवाओं का आधार स्तंभ है। अपनी प्रशिक्षण प्रणाली में एकसमान मानदंड, प्रमाण आधारित मूल्यांकन और निरंतर सुधार की संस्कृति अपनाकर एनएससीएसटीआई ने प्रशिक्षण संस्थाओं को उत्कृष्टता, नवाचार और समावेशन केंद्र के रूप में परिवर्तित किया है।

इसका लक्ष्य प्रत्येक सिविल सेवक चाहे वह किसी भी संवर्ग या स्थान से क्यों न हो उसे उच्च गुणवत्ता, भविष्योन्मुखी प्रशिक्षण की ऐसी सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए जिससे नागरिकों को सक्षमता, ईमानदारी और जवाबदेही के साथ सेवा देने की उनकी योग्यता बढ़ती जाए।

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उद्देश्य

इसका समग्र लक्ष्य प्रत्येक एवं सामूहिक रूप से सभी सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थाओं में पर्याप्त सुधार लाना है। इसके कार्यान्वयन के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:

बेसलाइन सृजन
प्रशिक्षण संस्थाओं की वर्तमान क्षमताओं की बेसलाइन सृजित करना
मानकीकरण
सभी प्रशिक्षण संस्थाओं में प्रशिक्षण में एकरूपता लाने के लिए मानक प्रक्रियाएं एवं कार्यविधियां निश्चित करना
संवर्धन
प्रशिक्षण संस्थाओं के प्रबंधन के लिए आयोजना एवं मार्गदर्शी साधन का काम करना, संस्थाओं की क्षमताओं में सुधार लाने में सहायता करना
गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम
सीबीसी द्वारा संस्थाओं के लिए 20 क्यूआईपी की शुरुआत की गई है जिससे राष्ट्रीय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके और क्षमता विकास अवसंरचना में सुधार लाने में सहायता की जा सके

क्षमता-विकास पहल

साथ में, क्षमता-विकास पहल को समस्तरीय प्रशिक्षण द्वारा गति मिलेगी। समय-समय पर संकाय विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे जिनमें एक समय पर 30-35 संकाय सदस्यों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, सीएसटीआई की भारतीय ज्ञान प्रणाली, प्रकरण आधारित प्रशिक्षण सामग्री और डिजिटलीकरण के विस्तार में सहायता की जाएगी। इसके लिए अकादमिक सहभागियों के साथ सुनियोजित कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी जिससे iGOT कर्मयोगी और अमृत ज्ञान कोशजैसे प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध सामग्री की गुणवत्ता एवं सुसंगतता बढ़ाई जा सकेगी।

एनएससीएसटीआई 2.0 फोकस क्षेत्र

एनएससीएसटीआई का लक्ष्य अगले चरण में निम्नानुसार प्रगति बढ़ाने का है:

  • क्यूआईपी से बेहतर परिणाम: संस्थानों को वर्तमान 0-2 स्टार स्तरों से 3 स्टार तक के मानदंड प्राप्त करने में समर्थ बनाना।
  • पुनर्मानकीकरण के लिए प्रेरित करना: संस्थानों को पहले मानकीकरण के समय से ही अपने मानकों के नवीकरण और उन्नयन के लिए प्रेरित करना।
  • एनएससीएसटीआई लाइट का शुभारंभ: छोटे प्रशिक्षण संस्थानों को सहभागिता बढ़ाने के लिए उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार सरलीकृत फ्रेमवर्क का शुभारंभ करना।
  • बेहतर डिजिटल अनुभव: मानकीकरण पोर्टल में अधिक अनुक्रियाशील एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल विशेषताएं जोड़कर नवीकरण करना।

 

एनएससीएसटीआई के बारे में

राष्ट्रीय सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्था मानक (एनएससीएसटीआई) एक प्रमुख मानकीकरण फ्रेमवर्क है जो मिशन कर्मयोगी के तहत क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) द्वारा विकसित किया गया है। सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थाओं (सीएसटीआई) की बेंचमार्किंग एवं गुणवत्ता संवंर्धन के लिए अलग से विकसित विश्व का सर्वप्रथम सर्वतोमुखी सिस्टम एनएससीएसटीआई समकालिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार सक्षम, परिणाम-केंद्रित और प्रशिक्षणार्थी-केंद्रित लोक सेवा निर्मित करने की भारत की प्रतिबद्धता की परिचायक है।

अक्तूबर 2021 में प्रथम सीटीआई गोलमेज सम्मेलन में शुरू किया गया यह सिस्टम एक व्यापक, परामर्शी प्रक्रिया द्वारा तैयार किया गया था। इसमें जनवरी 2022 और अप्रैल 2023 के बीच आयोजित छह विशेषज्ञ उप-समितियों एवं विस्तृत कार्याशालाओं का आयोजन भी शामिल है। दृष्टिकोण-पत्र एवं पोर्टल जुलाई 2022 में आधिकारिक रूप से जारी किया गया था। जून 2023 में आयोजित ऐतिहासिक राष्ट्रीय प्रशिक्षण संगोष्ठी सहित क्षमता-विकास कार्यशालाओं एवं सम्मेलनों में राष्ट्रव्यापी 1000 से अधिक सीएसटीआई को शामिल किया गया।

यह फ्रेमवर्क 8 मूल्यांकन स्तंभों पर आधारित है। इन स्तंभों का मूल्यांकन पांच-स्तरीय परिपक्वता मॉडल में मानकीकृत मापदंडों का उपयोग करके किया गया। इसमें प्रशिक्षण संस्थाओं को कमियों को दूर करने और निरंतर सुधार के लिए कार्यक्रम बनाने में सहायता की गई। एनएससीएसटीआई का सार्वजनीकरण, सुनियोजितता और अंगीकरण पर बल रहता है। यह सुनिश्चित करता है कि सभी सीएसटीआई चाहे राष्ट्रीय अकादमियां हों या क्षेत्रीय एटीआई फ्रेमवर्क से सार्थक रूप से जुड़ सकें।

जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार 200 सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थाओं को एनएससीएसटीआई के अंतर्गत मानकीकृत किया गया। मानकीकरण से प्रशासन-तंत्र, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, डिजिटल क्षमता और सहयोगात्मक पद्धतियों में सुधार हुआ। इन संस्थाओं की स्टार रेटिंग से उत्कृष्ट और भारी सहायता की आवश्यकता वाले दोनों क्षेत्रों का पता चलता है। इस प्रगति को बनाए रखने के लिए सीबीसी द्वारा 47 गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम शुरू किए गए हैं जिससे संस्थाओं की कमियों को दूर करने के स्पष्ट कार्यक्रम बनाने के लिए परामर्श दिया जा सके और उनकी मापने योग्य लक्ष्य निर्धारित करने में सहायता की जा सके।

समस्तरीय प्रशिक्षणों द्वारा प्रशिक्षण-तंत्र को और मजबूत किया गया है। संकाय विकास कार्यक्रमों (एफडीपी) द्वारा सीएसटीआई की संकाय क्षमता निर्मित हो पाई है। डिजिमंथन पहल द्वारा 1000 से अधिक कोर्सों के डिजिटलीकरण में सहायता करके एक मजबूत फिजिटल प्रशिक्षण-तंत्र को आगे बढ़ाने में मदद मिली है। क्षेत्रीय कार्यशालाओं और सम्मेलनों द्वारा परस्पर संस्थागत प्रशिक्षण, व्यापक सहभागिता को बढ़ावा मिला है और साझी प्रतिबद्धता द्वारा गुणवत्ता-सुधार के कार्य को प्रोत्साहन मिला है।

एनएससीएसटीआई 1.0 से भारत में सिविल सेवा प्रशिक्षण के मानकीकरण के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ है जिससे प्रमाण-आधारित मूल्यांकन और निरंतर संवर्धन की संस्कृति विकसित हो रही है। कार्यक्षेत्र के स्तर पर प्राप्त प्रतिसूचनाओं एवं सीख के आधार पर तैयार किया जा रहे एनएससीएसटीआई 2.0का लक्ष्य अधिक सरलीकृत, समावेशी एवं भविष्योन्मुखी होगा। इससे भारत के अनुक्रियाशील, कौशल-प्राप्त और उत्तरदायी सिविल सेवा के विजन को बल मिलेगा और एक अधिक विकसित सुशासन-तंत्र स्थापित हो पाएगा।

फ्रेमवर्क एवं दृष्टिकोण

एनएससीएसटीआई 8 मूल्यांकन स्तंभों पर आधारित है जो प्रशिक्षण संस्थाओं में उनके साथ उत्कृष्टता को परिभाषित करता है:

सुशासन एवं नेतृत्व

संकाय एवं प्रशिक्षण

पाठ्यक्रम एवं विषयवस्तु

अवसंरचना एवं संसाधन

डिजिटल क्षमता

अनुसंधान एवं नवाचार

सहयोग एवं लोकसंपर्क

निगरानी एवं मूल्यांकन

इनका मूल्यांकन पांच-स्तरीय परिपक्वता मॉडल का उपयोग करके किया जाता है। इससे प्रशिक्षण संस्थाओं की कमियों का पता लगाने में और सुधार के लिए कार्यक्रम बनाने में सहायता की जाती है।

विकास-क्रम (प्रायोगिक/चरणबद्ध)

 
 
18 जुलाई, 2022
माननीय राज्य मंत्री (पीपी) डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा एनएससीएसटीआई पोर्टल का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने दृष्टिकोण-पत्र भी प्रस्तुत किया। साथ ही, 40+सीएसटीआई के नोडल अधिकारियों के लिए क्षमता विकास कार्यशाला का आयोजन भी किया गया।
 
11 जून, 2023 
राष्ट्रीय प्रशिक्षण सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें 1000+सीएसटीआई के 1500 अधिकारियों ने सहभागिता की और सीएसटीआई के संवर्धन के लिए सहयोग, ज्ञान-विनिमय एवं नवाचार योजना प्रस्तुत की गईं।
 
16 अप्रैल, 2024 
डिजिमंथन 1.0 सीबीसी एवं केबी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया जिससे सीएसटीआई की और अधिक ई-लर्निंग कोर्स तैयार करने में सहायता की जा सके। 24 सीटीआई 30 जून 2024 तक कुल 78 डिजिटल कोर्स शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
 
12 अगस्त, 2024
सीएसटीआई सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें एनएससीएसटीआई मानकीकरण प्रक्रिया में सम्मिलित 144 संस्थाओं को सम्मान और अवार्ड दिए गए। माननीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा तीन नई पहलों – संकाय विकास कार्यक्रम, अमृत ज्ञान कोश एवं गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम का शुभारंभ भी किया गया। इस अवसर पर डिजिमंथन 2.0 का आयोजन भी किया गया जिसमें प्रशिक्षण संस्थाओं द्वारा iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 300+ कोर्सों के डिजिटलीकरण का संकल्प लिया गया।
 
9 दिसंबर, 2024 
सीएसटीआई के लिए उच्चस्तरीय प्रकरण लेखन कार्यक्रम और अमृत ज्ञान कोश का माननीय राज्य मंत्री (पीपी) द्वारा सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में शुभारंभ किया गया।
 
7 जनवरी, 2025 
मिशन कर्मयोगी कार्यशाला का बीआईपीएआरडी में आयोजन किया गया जिसमें सीटीआई और एटीआई द्वारा सहभागिता की गई।
 
10 फरवरी, 2025 
एनएससीएसटीआई फ्रेमवर्क उन्नयन कार्यशाला का दिल्ली में आयोजन किया गया जिसमें 40 से अधिक सीएसटीआई और अन्य हितधारकों ने सहभागिता की और एनएससीएसटीआई 2.0 फ्रेमवर्क विकसित करने में सहायता करने के लिए एनएससीएसटीआई फ्रेमवर्क पर प्राप्त अंतर्दृष्टि और प्रतिसूचना पर चर्चा की गई।
 
18 जुलाई, 2025 
एनएससीएसटीआई 2.0 फ्रेमवर्क का माननीय राज्य मंत्री (पीपी) डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा अध्यक्ष के तौर पर शुभारंभ किया गया। सभी संबद्ध हितधारकों से प्राप्त जानकारी के आधार पर पोर्टल पर पुनरीक्षित फ्रेमवर्क का शुभारंभ किया गया जो मानकीकरण और पुनर्मानकीकरण की योजना बना रहे हैं।

प्रमुख उपलब्धियां

200 सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थाओं को एनएससीएसटीआई फ्रेमवर्क के अंतर्गत मानकीकृत किया गया जिसमें 23 सीटीआई और 13 एटीआईसम्मिलित हैं। इस फ्रेमवर्क का अब विस्तार किया गया है जिससे क्षेत्रीय, आंचलिक एवं छोटे सीएसटीआई को भी शामिल किया जा सके और निर्धारित मानदंडों के अनुसार उन्हें भी मानकीकरण का पात्र बनाया जा सके।

मानकीकृत संस्थानों का विश्लेषण 

तालिका क: विभिन्न प्रकार के संस्थानों को मानकीकृत किया गया (26 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार) 

संस्थान-प्रकारमानकीकृत संस्थानों की संख्या
एटीआई13
सीटीआई23
अन्य164
कुल योग200

स्टार रेटिंग की स्थिति

तालिका ख: स्टार रेटिंग के अनुसार संस्थाओं की स्थिति 

स्टार रेटिंगसंस्थाओं की संख्या 
5 स्टार8
4 स्टार8
3 स्टार43
2 स्टार64
1 स्टार65
कोई स्टार नहीं65
कुल योग200

गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (क्यूआईपी)

राष्ट्रीय सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्था मानक (एनएससीएसटीआई) की मानकीकरण-प्रक्रिया एक बड़ी उपलब्धि है जो सिविल सेवा संस्थाओं में पूर्वनिर्धारित गुणवत्ता मानकों के अंगीकरण की परिचायक है। तथापि, मानकीकरण प्राप्त कर लेना सर्वोपरि नहीं है; यह एक आधार है जिसकी प्राप्ति के लिए संस्थाओं को संवर्धन एवं नवाचार अपनाने का निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। सीबीसी का लक्ष्य ऐसी संस्थाओं के गुणवत्ता-मानकों में सुधार लाने में सहायता करना और उन्हें सुनियोजित गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (क्यूआईपी) के माध्यम से प्रशिक्षण देने के कार्य में निरंतर सुधार लाने में समर्थ बनाना है।

गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (क्यूआईपी) में संस्था की सक्रिय संलग्नता एवं स्वामित्व से और संबद्ध मंत्रालयों, विभागों एवं संगठनों और सीबीसी की सहायता से निम्नलिखित का समावेश किया जाता है:

  • संस्थाओं के भीतर सुधार (नीचे लटकते फलों के सदृश) के तात्कालिक अवसर तलाशना।
  • आवश्यकता अनुरूप निर्मित, कार्यान्वयन योग्य गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम विकसित करना।
  • संस्थाओं में परामर्शदाता नियुक्त करना जिससे ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जा सके जिनमें सुधार की आवश्यकता है और गुणवत्ता संवर्धन के लिए कार्य-बिंदुओं एवं कार्य-नीतियों की अनुशंसा करना।
  • क्यूआईपी को ऐसे लक्षित प्रशिक्षणों पर फोकस करना जो संस्था के भीतर प्रशिक्षण गुणवत्ता में बड़े सुधार ला सकें।
  • क्यूआईपी निर्धारित समय-सीमाओं के भीतर कार्यान्वित करना जिससे संस्था, परामर्शदाता एवं सीबीसी द्वारा इसकी स्थिति का पता लगाया जा सके।

वर्तमान में 47 गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम सीबीसी द्वारा शुरू किए गए हैं।

अब तक प्रभाव

200
संस्थान मानकीकृत
47
क्यूआईपी लागू
1000+
कोर्स डिजिटलीकृत

भावी कार्यक्रम

एनसीएसटीआई फ्रेमवर्क के अंतर्गत 370+ सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थाओं (सीएसटीआई) का मानकीकरण क्षमता-विकास तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। सीएसटीआई उत्तरोत्तर फ्रेमवर्क के महत्व को समझकर इसे अपना रहे हैं। उनका अगला कदम परिमाण-उन्नयन, गहन प्रभाव डालने और प्रशिक्षण देने में निरंतर सुधार सुनिश्चित करना होना चाहिए।

गुणवत्ता सुधार कार्यक्रमों (क्यूआईपी) का परिमाण-उन्नयन

गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (क्यूआईपी) क्षमता विकास के प्रभावी साधन सिद्ध हुआ है। भविष्य में निम्नलिखित पर फोकस होना चाहिए:

  • क्यूआईपी को आवश्यकता अनुरूप तैयार करना चाहिए जिससे क्षेत्रीय एवं छोटे सीएसटीआई की अनन्य शक्तियों एवं चुनौतियों को समझा जा सके।
  • निरंतर सुधार के लिए प्रगति पर नजर रखना और परामर्श देना।

क्षेत्रीय जुड़ाव

फ्रेमवर्क का विस्तार कर अब क्षेत्रीय एवं छोटे सीएसटीआई को शामिल किया जा रहा है:

  • स्थानीकृत स्पोर्ट सिस्टम्स: निरंतर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए परामर्शन एवं स्पोर्ट के लिए क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करना।
  • ज्ञान साझा करना: क्षेत्रीय कार्यशालाओं एवं ज्ञान-साझा करने के प्लेटफॉर्मों के माध्यम से सीएसटीआई के बीच परस्पर प्रशिक्षण को बढ़ावा देना।

सहयोग

फ्रेमवर्क के प्रभाव को बढ़ाने के लिए साझेदारियों को मजबूत करना: हितधारकों के साथ सहयोग: सीएसटीआई, सरकारी एजेंसियों एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के बीच संसाधन इष्टतम उपयोग के लिए सहयोग बढ़ाना।

इन कार्यनीतियों पर फोकस करके एनएससीएसटीआई फ्रेमवर्क भारत में क्षमता-विकास-तंत्र के संवर्धन के एक परिवर्तनकारी साधन के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकता है। इसके लिए उसे सुनिश्चित करना होगा कि प्रशिक्षण देने का कार्य प्रशासन की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करे।

शंसा पत्र एवं उद्गार

“एनएससीएसटीआई ने युगांतरकारी परिवर्तन लाया है कि कैसे हमारी संस्थाएं गुणवत्ता को आंकती हैं और भविष्य के कार्यक्रम बनाती हैं।” 

— निदेशक, मानकीकृत सीटीआई 

“फ्रेमवर्क सुनिश्चित करता है कि कोई प्रशिक्षण संस्था उत्कृष्टता की यात्रा में पीछे नहीं रहे।” 

— वरिष्ठ संकाय, एटीआई