Capacity Building Commission

नीति में ज्ञान एवं परंपरा

भारतीय ज्ञान प्रणाली

भारत की सभ्यता के ज्ञान पर आधारित सिविल सेवा क्षमता-विकास में प्रज्ञात्मक भारतीयता को आगे बढ़ाना जिससे ऐसे सुशासन को आकार दिया जा सके जिसकी जड़ें हमारी संस्कृति में गहरी हैं, जो सुनियोजित है और जिसके मूल सिद्धांत भारतीय नीतिशास्त्र में मिलते हैं।

विजन

क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) में भारतीय ज्ञान पद्धति (आईकेएस) कक्ष द्वारा एक ऐसी सिविल सेवा की परिकल्पना की गई है जो भारतीय सभ्यता के शुरुआती ज्ञान-विज्ञान पर आधारित हो और 21वीं शताब्दी की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूर्णतया तैयार हो। इस बात को समझते हुए कि भारत के प्रशासनिक ढांचे को उपनिवेशिक ज्ञान प्रणाली द्वारा आकार दिया गया जिसमें विकास की तुलना में पृथक्करण और समाज की तुलना में पद को महत्व दिया गया। आईकेएस कक्ष का प्रज्ञात्मक उपनिवेश के स्थान पर स्वदेशी ज्ञान एवं कर्म सिद्धांतों को पुनर्स्थापित करके आगे बढ़ाने का ध्येय है।

उसका लोक सेवा का विजन अंत्योदय (अंतिम व्यक्ति का उद्धार) से जगत् हित (विश्व कल्याण) का पथ प्रशस्त करने वाला है। कक्ष की विकसित भारत@2047 की राष्ट्रीय परियोजना को सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय के नैतिक उत्तरदायित्व से जोड़ने की दिशा में अग्रसर है।

यद्यपि धार्मिक सिद्धांतों, विकास नीति और ज्ञान-विज्ञान की विविध शाखाओं को क्षमता-विकास कार्यक्रमों से जोड़कर आईकेएस कक्ष का एक ऐसी सिविल सेवा तैयार करने का लक्ष्य है जिसकी जड़ें हमारी संस्कृति में गहरी हैं, जो सुनियोजित है और जिसके मूल सिद्धांत भारतीय नीतिशास्त्र में मिलते हैं। यह परिवर्तन केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं है। इसमें स्वाध्याय-संवर्धन, भारतीय नीतिशास्त्र के मूल सिद्धांतों की पुनर्स्थापना और अनुभव आधारित, चिंतनपरक प्रशिक्षण का अंगीकरण करने पर बल है जिससे सिविल सेवक शुद्धता, करुणा और स्वधर्म के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।

प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं सांस्थानिक फ्रेमवर्क में भारतीय ज्ञान पद्धति का समावेश कर कक्ष प्रशासन को अधिक समावेशी, भविष्योन्मुखी और उत्तरदायी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे लोक प्रशासन केवल नियम अनुपालक न रहकर नीतिपूर्ण सेवा एवं सेवकत्व का जीवंत उदाहरण बन सके।

पहल संक्षिप्त विवरण

फोकस

प्रज्ञात्मक अन-उपनिवेशिकरण एवं सांस्कृतिक आधार

लोकसंपर्क

500+ सिविल सेवक एवं संकाय 
24+ सीएसटीआई

प्रमुख फ्रेमवर्क

कर्मयोगी सक्षमता मॉडल जो आईकेएस से जुड़े हैं

पद्धति

कार्यशालाएं, अवलोकन, कोर्स एवं अनुसंधान

प्रमुख कार्यक्षेत्र

सुशासन एवं प्रशासन
सुशासन, प्रशासन एवं लोक सेवा की पारंपरिक व्यवस्था
विधि एवं न्याय
पारंपरिक विधि व्यवस्था एवं न्याय सिद्धांत
कृषि एवं पर्यावरण
पारंपरिक कृषि पद्धतियां एवं पर्यावरण प्रबंधन
स्वास्थ्य एवं औषधियां
पारंपरिक औषधियां एवं स्वास्थ्य सेवाएं
वास्तुशास्त्र एवं आयोजना
पारंपरिक वास्तुशास्त्रीय सिद्धांत एवं शहरी आयोजना की अवधारणा
दर्शन एवं नीतिशास्त्र
दर्शनशास्त्र के सिद्धांत एवं नीतिशास्त्रीय ढांचा

उद्देश्य

क. पाठ्यक्रम-संयोजन एवं प्रशिक्षण-पुनर्विन्यास

  • लोक प्रशासन प्रशिक्षण में आईकेएस फ्रेमवर्क (अर्थात स्वधर्म, पंचकोश) का समावेश
  • सिविल सेवा मॉड्यूल के पुनर्विन्यास में सीएसटीआई एवं सीटीए के साथ सहयोग
  • तकनीकी अनुदेशात्मक शैली की तुलना में प्रज्ञात्मक, अनुभवजन्य एवं मूल्य-आधारित प्रशिक्षण पद्धतियों को प्राथमिकता

ख. विषयवस्तु विकास एवं प्रसार

  • आईकेएस-समन्वित डिजिटल कोर्सों का iGOT-कर्मयोगी के लिए सृजन।
  • भारतीय ग्रंथों (अर्थात् महाभारत, अर्थशास्त्र, तिरुक्कुरल) पर आधारित ऐसे कोर्सों का निर्माण जिन्हें प्रशिक्षण सामग्री में कार्यान्वित किया जा सके।
  • नॉलेज पार्टनरों के साथ कार्यशालाओं की ऐसी रूपरेखा तय करना जो भारतीय प्रतिमानों (अर्थात् गुण, स्वभाव, पंचमहाभूतों) पर आधारित हो।

ग. संस्थागत निगरानी एवं उपनिवेश से भिन्न आयोजना

  • सीएसटीआई द्वारा प्रस्तुत छमाही उपनिवेश इतर कार्यक्रमों की निगरानी करना।
  • संस्थाओं की सहायता करना जिससे वे नीतिनिर्माण, प्रशासन एवं नेतृत्व में उपनिवेशवादी मानसिकता से अलग भारतीय मौलिक सिद्धांतों को अपना सकें।
  • भारतीय पद्धतियों के अंगीकरण में होने वाली प्रगति को लिपिबद्ध करके उसका मूल्यांकन किया जाए।

घ. सुशासन एवं नीतिनिर्माण में आईकेएस का सांस्थानीकरण

  • राष्ट्रीय सुशासन फ्रेमवर्क (अर्थात् राष्ट्रीय शिक्षा नीति, कर्मयोगी सक्षमता मॉडल, अमृत काल विजन) में आईकेएस मूल्यों को प्रमुखता।
  • धार्मिक, कर्तव्य-केंद्रित एवं निर्माण आधारित नैतिक मूल्यों को आगे बढ़ाना।
  • नीतिगत समस्याओं और उनके समाधानों की अवधारणा को नया आकार देने के लिए उपनिवेशिक ज्ञान से भिन्न प्रज्ञात्मक सोच को अग्रसारित करना।

ङ. ज्ञान विकास एवं अनुसंधान तंत्र

  • अकादमिक एवं नीतिगत संस्थाओं में आईकेएस विद्यापीठ, अध्येतावृत्ति (फेलोशिप) और उत्कृष्टता केंद्रों की सहायता करना।
  • समकालिक चुनौतियों (अर्थात जलवायु, शहरी आयोजना, स्वास्थ्य) में आईकेएस लागू करने के लिए अंतर्विषय अनुसंधान में सहायता करना।

च. क्षेत्र अवलोकन एवं समाज सह सृजन

  • सिविल सेवकों को यात्राओं एवं दीर्घावधि अवलोकन के लिए समर्थ बनाना जिससे वे आईकेएस को व्यवहार में लाने वाले समाज के साथ सीधे सीख सकें।
  • समाज को ज्ञान का साझेदार समझें न कि जानकारी प्राप्त करने का स्रोत मात्र।
  • इस प्रकार के प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाए जिससे मानवीयता, परानुभूति एवं गहन निर्माण की समझ विकसित हो सके।

छ. नॉलेज पार्टनरों का सशक्तिकरण

  • आईकेएस आधारित ज्ञान प्रदाताओं एवं विशेषज्ञों के साथ गहन और विस्तृत सहयोग करना।
  • आईकेएस-संचालित कार्यशालाओं एव कोर्सों का अकादमिक एवं व्यवहारकर्ता के साथ सह-आयोजन किया जाए।

प्रमुख उपलब्धियां

आईकेएस कक्ष की स्थापना
क्षमता विकास आयोग में आईकेएस कक्ष का प्रतिष्ठापन
कर्मयोगी सक्षमता मॉडल
आईकेएस संयोजन के पहले कदम में स्वधर्म, सहकार्यता, एवं योगक्षेम जैसे तत्वों को सम्मिलित किया जाता है
कोर्स एवं टूलकिट
iGOT पर और सीएसटीआई (अर्थात् शुद्ध नेतृत्व: लोक सेवा कार्यशाला एवं कोर्स) के माध्यम से विकसित एवं स्थापित
कार्यशालाएं एवं अवलोकन
24+ सीएसटीआई के साथ संचालन जिसमें 500+ सिविल सेवकों एवं संकाय के साथ संपर्क
अनुसंधान एवं चिंतनशील नेतृत्व
आईकेएस-आधारित नीति निर्माण पत्र; धार्मिक सुशासन प्रतिमानों का विकास
एनएससीएसटीआई मानकीकरण 2.0
पुनरीक्षित एनएससीएसटीआई मानकीकरण 2.0 फ्रेमवर्क में आईकेएस मेट्रिक्स का समावेश ताकि सांस्कृतिक एवं निर्माणपरक सोच को बल मिले

भावी कार्यक्रम

संवाद एवं लोकसंपर्क

  • लिंक्डइन पर ऐसी कहानियां नियमित रूप से साझा करें जिनमें सीएसटीआई-नेतृत्व वाले आईकेएस पहलों को दिखाया गया हो।
  • आईकेएस विशेषज्ञों के साथ कर्मयोगी वार्ता श्रृंखलाओं को शुरू किया जाए।
  • आईकेएस अवधारणाओं एवं शब्दावली का मुख्यतया सुशासन तंत्र के भीतर प्रचार किया जाए।

सीएसटीआई को उपनिवेशिक सोच से भिन्न भारतीयता की ओर ले जाना

  • सीएसटीआई आईकेएस एसपीओसी के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखे जिससे उपनिवेशिक सोच से अपने को अलग करने की योजनाओं की निगरानी की जी सके।
  • सभी राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों में यात्राएं की जाए और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं।
  • आईकेएस विषयवस्तु का iGOT में विस्तार किया जाए और निरंरतर अंगीकरण के लिए सुनियोजित प्रशिक्षण पद्धतियां डिजाइन की जाएं।

चिंतनशील नेतृत्व के लिए सहयोग

  • संयुक्त अनुसंधान के लिए एनसीए-एफ के अनुरोध का मूल्यांकन करें जिससे सीएसटीआई में आईकेएस के सांस्थानीकरण के लिए साझा फ्रेमवर्क डिजाइन किया जा सके।
  • अनुसंधान पत्र से एक परिचालन मैनुअल विकसित करना जिससे प्रशिक्षण तंत्र में आईकेएस का समावेश का मार्ग प्रशस्त हो सके।
  • एआई और आईकेएस की भिन्नताओं का पता लगाएं जिससे ज्ञान क्षेत्र का विस्तार किया जा सके।

ज्ञान साझीदारों का सशक्तिकरण

  • बृहत, टीएओ, इंडिका, कौटिल्य लोक नीति विद्यालय, आरोह के साथ और अधिक सहयोग करना: नेतृत्व परियोजना एवं व्यवहारकर्ता नेटवर्क।
  • आईकेएस-संचालित कार्यशालाओं एव कोर्सों का अकादमिक एवं व्यवहारकर्ता के साथ सह-आयोजन किया जाए।

प्रगति समीक्षा एवं प्रभाव

  • आईकेएस-प्रेरित सुशासन प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन करने के लिए मेट्रिक्स एवं डैशबोर्ड निर्मित करना।
  • iGOT पर आईकेएस कोर्सों को अनिवार्य बनाने की अनुशंसा करना।
  • सीएसटीआई द्वारा प्रस्तुत छमाही उपनिवेश इतर योजनाओं की रिपोर्ट का संकलन एवं प्रकाशन करना।
  • iGOT पर अमृत ज्ञान कोश (एजीके) में आईकेएस आधारित प्रकरण अध्ययन शुरू करना।

अवधारणात्मक फ्रेमवर्क

परिचय

क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) में भारतीय ज्ञान पद्धति (आईकेएस) की पहल सिविल सेवा क्षमता-विकास के परिवर्तनकारी दृष्टिकोण की परिचायक है जो भारतीय सभ्यता की समृद्ध ज्ञान परंपरा को समकालिक सुशासन फ्रेमवर्क से जोड़ने का पथप्रशस्त करती है। इस पहल में इस आवश्यकता को समझा गया है कि भारत के प्रशासनिक ढांचे को उपनिवेशिक ज्ञान प्रणाली द्वारा आकार दिया गया जिसमें विकास की तुलना में पृथक्करण और समाज की तुलना में पद को महत्व दिया गया जिसे प्रज्ञात्मक उपनिवेश के स्थान पर स्वदेशी ज्ञान एवं कर्म सिद्धांतों से पुनर्स्थापित किया जाए।

प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में आईकेएस फ्रेमवर्क जैसे स्वधर्म (सुनियोजित कर्तव्यनिष्ठा), पंचकोश (समग्र विकास) और धार्मिक सिद्धांतों का समावेश करने की इस पहल का लक्ष्य सिविल सेवकों में शुद्धता, करुणा और गहन कर्तव्य बोध विकसित करना है। इस पद्धति में तकनीकी अनुदेशात्मक शैली की तुलना में प्रज्ञात्मक, अनुभवजन्य एवं मूल्य-आधारित प्रशिक्षण पद्धतियों और भारतीय ग्रंथों जैसे महाभारत, अर्थशास्त्र, तिरुक्कुरल के सदैव प्रभावी ज्ञान को सुशासन की पद्धतियों में शामिल कर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने पर बल दिया गया है।

इस पहल का विजन अंत्योदय (अंतिम व्यक्ति का उद्धार) से जगत् हित (विश्व कल्याण) का पथ प्रशस्त करने वाला और विकसित भारत@2047 की राष्ट्रीय परियोजनाओं को सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय के नैतिक उत्तरदायित्व से जोड़ने की दिशा में अग्रसर है। इसमें समाज को ज्ञान साझीदार माना गया है और क्षेत्र अवलोकनों एवं यात्राओं के लिए समर्थ बनाने की बात कही गई है। इस पहल के माध्यम से एक ऐसे सुशासन-तंत्र स्थापित करने की परिकल्पना की गई है जो समावेशी, भविष्योन्मुखी और उत्तरदायी हो और जिसमें लोक प्रशासन नीतिपूर्ण सेवा एवं सेवकत्व का एक जीवंत उदाहरण बन सके।

पूर्ण अवधारणा टिप्पणी: अपलोड किया जाएगा

संबद्ध जानकारी

24+
सीएसटीआई सम्मिलित
500+
सिविल सेवक एवं संकाय से संपर्क
15+
कोर्स iGOT पर उपलब्ध

सूचना संग्रहण एवं अद्यतनीकरण

कार्यशालाओं, कोर्स संकलन, सहभागी प्रतिक्रिया और प्रभाव आकलन संबंधी विस्तृत जानकारी निरंतर संगृहीत की जा रही है और इस पृष्ठ पर अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। आईकेएस कक्ष सभी पहलों, भागीदारियों और परिणामों का विस्तृत रिकॉर्ड रखता है जिससे प्रगति पर नजर रखी जा सके और प्रभाव का आकलन किया जा सके।

प्रभाव आकलन (परिणाम-प्राप्ति, आकलन संकेतक)

निष्पादन

  • iGOT पर विकसित और उपलब्ध आईकेएस कोर्सों की संख्या
  • कार्यशालाओं एवं अवलोकनों की संख्या
  • उपनिवेशिक सोच बदलने की योजना में शामिल सीएसटीआई की संख्या
  • आईकेएस फ्रेमवर्क में प्रशिक्षित संकाय सदस्यों की संख्या

परिणाम

  • प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में अधिक आईकेएस फ्रेमवर्क को जोड़ा गया
  • सुशासन प्रशिक्षण में अधिक सांस्कृतिक एवं संदर्भगत संबद्धता
  • सिविल सेवकों में धार्मिक सुशासन सिद्धांतों की अधिक समझ
  • ईकेएस-आधारित संस्थाओं के साथ ज्ञान साझेदारी को मजबूत किया गया है

संकेतक

  • ऐसे सीएसटीआई के प्रतिशत में वृद्धि जिनकी आईकेएस जुड़ाव कार्यक्रम सक्रिय हैं
  • iGOT में आईकेएस मॉड्यूलों की कोर्स पूरा करने की दर में वृद्धि
  • कार्याशालाओं में सहभागियों के संतुष्टि स्कोर में वृद्धि
  • अमृत ज्ञान कोश में आईकेएस-आधारित प्रकरण अध्ययनों की संख्या में वृद्धि