Capacity Building Commission

प्रोफेशनल विकास

संकाय विकास कार्यक्रम

सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों में संकाय क्षमता विकास जिससे प्रशिक्षण की प्रभावशीलता बढ़ाकर नागरिक-केंद्रितता को प्रोत्साहित करना

संकाय विकास के लिए विजन

सीबीसी देश भर में सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता बढ़ाना चाहता है। केंद्र सरकार लगभग 1100 प्रशिक्षण संस्थानों की निगरानी करती है। इनमें 25 केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान (सीटीआई) और 33 राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (एटीआई) हैं। इन प्रशिक्षण संस्थानों के संकाय लोक सेवा अधिकारियों के प्रशिक्षण की सफलता के सूत्रधार हैं।

संकाय विकास कार्यक्रम – संकल्पना

क्षमता विकास आयोग सरकार की क्षमता विकास के अपने प्रयसों में सिविल सेवा संस्थानों के सभी संकायों के कौशल बढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाना चाहता है जिससे प्रशिक्षण के बेहतर परिणाम तो प्राप्त होंगे ही साथ ही अधिकारियों का निष्पादन भी दक्षतापूर्ण होगा। इन सीएसटीआई के संकाय क्षेत्र विशेष का अच्छा अनुभव रखते हैं जो अधिकारियों के प्रशिक्षण से अधिकाधिक जुड़ा है जिसे प्राप्त करके अधिकारी उच्चतर निष्पादन के साथ-साथ बेहतर लोक सेवा भी दे पाते हैं। ये संकाय प्रभावी प्रशिक्षण के लिए उतनी आवश्यक वैज्ञानिक दृष्टि से संपन्न नहीं होते। इस परिकल्पना को संकायों के साथ गोलमेज विचार-विनिमय करके और उनके लिए प्रायोगिक कार्यक्रम और उनका मूल्यांकन करके सीबीसी सहयोग कर रहा है।

इस बड़े अंतर को दूर करने के लिए सीबीसी द्वारा सीएसटीआई के संकाय सदस्यों के क्षमता विकास के लिए दो चरणों में प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है। सीएसटीआई में 60% संकाय सिविल सेवा से जुड़े रहे होते हैं जो प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण देने का समृद्ध अनुभव लेकर आते हैं। सिविल सेवा से जुड़े होने के कारण प्राप्त अनुभव एवं अकादमिक सिद्धांतों एवं फ्रेमवर्कों से प्रशिक्षणार्थी की क्षमता बढ़ाने का आधारभूत कार्य अच्छे से संपन्न हो जाता है।

सीएसटीआई संकाय के प्रशिक्षण द्वारा उनका निम्नलिखित के लिए उत्साहवर्धन किया जाता है:

  • सिविल सेवा में उनके अनुभव और उसके साथ-साथ अकादमिक सिद्धांतों की जानकारी से वे अपने प्रशिक्षणार्थियों का ध्यान उसके प्रभाव और राष्ट्र एवं उसके नागरिकों को सेवा देने में सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने की ओर आकृष्ट करें।
  • अपने सीएसटीआई में प्रशिक्षण के प्रति सुलभकर्ता की दृष्टि रखकर वे अपने प्रशिक्षणार्थियों को कौशल-संवर्धन के अवसरों का लाभ उठाने और अपने में नागरिक-केंद्रित सेवा देने की मानसिकता विकसित करने के लिए प्रेरित करें।
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  • ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करें जो चिंतनपरक हों, अभ्यास पर प्रतिक्रिया लेने और समकक्षों की कार्यप्रणालियों की भी जानकारी देने वाले हों जिससे वे प्रशिक्षण के प्रति उत्साहित हों और अपने प्रशिक्षणार्थियों के साथ मिलकर अनुभवजन्य प्रशिक्षण सामग्री तैयार करें।
  • प्रशिक्षण में ज्ञान एवं सिद्ध पद्धतियों को शामिल किया जाए जिसमें भारतीय लोक प्रशासन की उपलब्धियों का उल्लेख करने के साथ-साथ वैश्विक प्रशिक्षण प्रणालियों को भी शामिल किया जाए। 

दो चरणों में प्रशिक्षण

सीबीसी दो चरणों में सुनियोजित प्रशिक्षण द्वारा सरकारी-तंत्र में संकाय विकास के लिए सरकार के भीतर से ही क्षमता विकसित करना चाहता है। उच्च-स्तरीय संकाय विकास कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षित संकाय निम्नानुसार विशेष कौशलों से सुसज्जित विविध संकाय समूह विकसित करना चाहता है जो सीएसटीआई नेटवर्क और इसके संकाय को संकाय विकास कौशलों में निरंतर सशक्त बनाता रहे।

चरण 1

अनिवार्य ऑनलाइन स्व-गति प्रशिक्षण

अवधि: 3-4 घंटे

आइगॉट प्लेटफॉर्म पर इस ऑनलाइन प्रशिक्षण में सैद्धांतिक पक्षों को शामिल किया जाता है जिससे शिक्षण एवं प्रशिक्षण की प्रक्रिया को वैज्ञानिक ढंग से समझा जा सके। इस स्तर-1 प्रशिक्षण कार्यक्रम में इससे जुड़े सैद्धांतिक विषयों और सिद्धांतों को शामिल किया जाता है जो प्रभावी प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने और कार्यक्रम को संचालित करने के साथ-साथ प्रशिक्षण के माध्यम से परिवर्तन की प्रक्रिया को समझाने में सहायक हो।

Tयह प्रशिक्षण कार्यक्रम सीएसटीआई में पदस्थ किए जाने वाले प्रत्येक संकाय के लिए अनिवार्य है भले ही उसकी कार्य-प्रकृति और कार्य-काल कुछ भी हो। 

चरण 2

उच्च-स्तरीय संकाय विकास कार्यक्रम

सीबीसी सीएसटीआई के चयनित संकाय सदस्यों के लिए उच्च-स्तरीय संकाय विकास कार्यक्रम संचालित करता है। सीएसटीआई प्रधान इन कार्यक्रमों के लिए संकाय को नामांकित करते हैं जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सहभागी वरिष्ठ संकाय है जो कम से कम अगले वर्ष तक प्रशिक्षण कार्य से जुड़ा रहेगा और इस प्रशिक्षण का उसके संस्थान को लाभ मिलेगा।

प्रायोगिक संकाय विकास कार्यक्रम से सीख

प्रायोगिक कार्यक्रम में स्थान-विशेष की समझ दी जाती है जिसे उपर्युक्त नीति में उल्लिखित भविष्य के कार्यक्रम बनाने में शामिल किया जाएगा।

समान संस्थान (Peer) से सीख एवं मैत्री

सहभागियों को स्थान देना – जो उसी संस्थान के हों या किसी अन्य संस्थान के हों – इससे संकाय को अपनी चुनौतियां साझा करने और मैत्री का मार्ग प्रशस्त करने और समान संस्थाओं के एक दूसरे के प्रशिक्षणार्थियों से जुड़ने का अवसर मिलता है। इससे एक दूसरे से सीख कर प्रशिक्षण की प्रक्रिया सुगम बनती है।

कार्य-पर अनुभव

कार्य-पर अनुभव सहभागियों के लिए उपयोगी होता है जिससे वे समान संस्थानों की अंतर्दृष्टि और विचार जान पाते हैं और उस पर चिंतन करके तथा उनसे मिली सीख का अपनी स्वयं की प्रशिक्षण पद्धतियों में उपयोग कर सकते हैं।

संदर्भ सामग्री

संदर्भित प्रकरण अध्ययनों या प्रयुक्त उदाहरणों के अनुसार कार्यक्रम की संदर्भ सामग्री तैयार करना जिससे इन दोनों के बीच के अंतर को पूरा करने का काम भविष्य के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के समय अवश्य हो जाए।

उच्च-स्तरीय संकाय विकास कार्यक्रम के लिए कार्यक्रम तत्व

संकाय विकास कार्यक्रम – चाहे ऑनलाइन हो या प्रत्यक्ष माध्यम में 3 तत्व – सुसंगतता, संबद्धता और प्रयोज्यता शामिल रहते हैं जिससे इसके सहभागियों को सीखने का अधिकतम लाभ मिल सके। .

प्रभावी एफडीपी के लिए प्रमुख अपेक्षाएं

यह सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि विषयवस्तु सीएसटीआई के संकाय के लिए सुसंगत है और ऐसे कार्यक्रमों से निरंतर मिलने वाली प्रतिक्रियाओं पर आधारित हो जिनमें प्रबंधन संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। नॉलेज पार्टनर जो सीबीसी और इनसे जुड़े सीएसटीआई के लिए और एफडीपी संचालित करेंगे, उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रयुक्त उदाहरणों के संदर्भ केंद्र या राज्य सरकार से हों और लोक प्रशासन व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने वाले हों। इसी तरह, प्रशिक्षण तकनीकें, विधियां या संकाय विकास कार्यक्रम के माध्यम से सिखाए गए सिद्धांत सहभागियों को उनके संदर्भों के साथ-साथ उनके प्रशिक्षणार्थियों के संदर्भों को भी अपने साथ जोड़ सकें। एफडीपी में सहभागिता करने वाले संकाय कार्यक्रमों के तत्काल पश्चात अपने संस्थानों में इन सीखों का उपयोग करने में समर्थ हों जिससे तत्काल और निरंतर परिवर्तन सुनिश्चित किए जा सकें।

संकाय विकास कार्यक्रमों के सामान्य विषय

फैसिलिटेटर की भूमिका को समझना
प्रशिक्षण की आश्यकताओं के विश्लेषण से लेकर कोर्स के मूल्यांकन की रूपरेखा तय किए जाने तक कोर्स डिजाइन के तत्वों का समावेश
प्रशिक्षण ऑडिट एवं प्रशिक्षण अभिकल्पना सिद्धांत 
आधारभूत सिद्धांत जैसे ब्लूम का टैक्सोनॉमी, कॉयब का आनुभाविक प्रशिक्षण चक्र, आदि 
विविध प्रशिक्षण तकनीकों का समावेश जैसे प्रकरण लेखन, फ्लिप्पड क्लासरूम आदि 
प्रौद्योगिकी की सहायता से शिक्षण जगत की व्यवस्था का विकास