क्षमता निर्माण आयोग

Opinions Do Matter

Insights, experiences, and perspectives from leaders and participants in Mission Karmayogi

Insights, experiences, and perspectives from leaders and participants in Mission Karmayogi
नागरिक-केंद्रित सेवा के लिए प्रतिबद्ध

नागरिक-केंद्रित सेवा के लिए प्रतिबद्ध

एनएलसी इंडिया लिमिडेट,

महाप्रबंधक (विपणन-पीसी), कोयला मंत्रालय
सहभागी

एनएलसी इंडिया लिमिटेड, कोयला मंत्रालय

एनएलसी इंडिया लिमिटेड के इन सहभागी ने अपने कार्यों के माध्यम से नागरिकों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने की अपनी प्रतिबद्धता साझा की।

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सेवा भावना का अर्थ

सेवा भावना का अर्थ

श्री शरद कुमार त्रिपाठी

महाप्रबंधक (विपणन-पीसी), गेल (इंडिया) लिमिटेड
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय । मुख्य प्रशिक्षक

इस प्रशिक्षण से मुझे बहुमूल्य नई अंतर्दृष्टि प्राप्त हुई है। इससे मेरा राष्ट्रीय कर्मयोगी पहल के लीड ट्रेनर की अपनी भूमिका के प्रति उत्साहवर्धन हुआ है। इससे मुझे सबसे बड़ा सबक यह मिला कि सेवा भावना हम सभी में पहले से ही विद्यमान है। इसे केवल जाग्रत करने की आवश्यकता है। मुझे यह ज्ञात हुआ है कि मेरा कार्य और मेरे ग्राहक कैसे अपनी सृजनात्मकता से राष्ट्र-सेवा कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में प्राप्त अद्भुत अनुभव मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

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प्रक्रिया-संचालित से प्रयोजन-संचालित कार्य

प्रक्रिया-संचालित से प्रयोजन-संचालित कार्य

श्रीमती संजुक्ता रक्षित

महाप्रबंधक, इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय । केवाई फैसिलिटेटर

इस कार्यक्रम से मुझे आत्म-चिंतन में सहायता मिली और मेरे कार्य-दृष्टिकोण में परिवर्तन हुआ। मैं अपने कार्य को पहले प्रक्रिया-संचालित समझती थी पर अब मैं इसे प्रयोजन-संचालित समझने लगी हूँ। अपने दैनिक कार्यकलाप द्वारा हम राष्ट्र-निर्माण में योगदान कर रहे हैं।

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राष्ट्र निर्माण: एक परिवर्तित दृष्टिकोण

राष्ट्र निर्माण: एक परिवर्तित दृष्टिकोण

श्रीमती मिली भौमिक

डाक निरीक्षक, पश्चिम बंगाल डाक मंडल, डाक विभाग, संचार मंत्रालय । केवाई फैसिलिटेटर

राष्ट्रीय कर्मयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम से मेरा संपूर्ण दृष्टिकोण परिवर्तन हुआ है। इसके पहले मैं अपने कार्य को केवल अपना उत्तरदायित्व समझती थी परंतु अब मैं अपनी भूमिका के दैनिक कर्तव्यों के निर्वहन को राष्ट्र-निर्माण में योगदान करने के एक अवसर के रूप में देखती हूँ। इस प्रशिक्षण को प्राप्त करने के पश्चात् मैं देश के विकास का एक महत्वपूर्ण सहभागी होने पर अपने को गौरवान्वित अनुभव करती हूँ। मैं अपने सहकर्मियों के साथ अपनी यह भावना साझा करने के लिए उत्सुक हूँ।

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राष्ट्रीय संचार अकादमी-वित्त: उत्कृष्टता की ओर एक परिवर्तनकारी कदम

राष्ट्रीय संचार अकादमी-वित्त: उत्कृष्टता की ओर एक परिवर्तनकारी कदम

माधवी दास

महानिदेशक, राष्ट्रीय संचार अकादमी
वित्त

सीबीसी की राष्ट्रीय मानकीकरण योजना में “सर्वोत्कृष्ट” 5-स्टार रेटिंग अर्जित करना; राष्ट्रीय संचार अकादमी-वित्त के लिए निश्चित ही एक परिवर्तनकारी कदम है। सीबीसी के सख्त और व्यापक पैरामीटरों ने हमें अपने प्रत्येक कार्य की समीक्षा करने – चुनौतियों की पहचान करने, प्रक्रियागत सुदृढ़ीकरण एवं निरंतर सुधार के उपाय करने और एसओपी तैयार करने के लिए प्रेरित किया। इससे हमारा कामकाज उत्तरोत्तर उत्कृष्ट होता चला गया।

सीबीसी की गुणवत्ता सुधार योजना (क्यूआईपी) भी हमारे लिए अनमोल सिद्ध हुई। इससे हमारी फोकस पर पैनी नजर बनी रही और हमारे निष्पादन में स्पष्ट सुधार दिखाई देने लगा।  हमारी इस उत्कृष्टता की यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि हमारे अथक प्रयास रहे जिनके बल पर हम उल्लेखनीय परिणाम हासिल कर पाए।  हालांकि हमें उच्चतम रेटिंग प्राप्त करने का गौरव मिला है पर इस अनुभव ने हमें और बेहतर प्रदर्शन करने, निरंतर सुधार करते जाने तथा अपने लिए उपलब्धियों के नए मापदंड गढ़ने के लिए उत्साहित किया।

“हमारे प्रयासों ने ही हमारी सफलता को निश्चित कर दिया था। यद्यपि हमें सर्वोत्कृष्ट रेटिंग प्राप्त करने का गौरव मिला है पर इस अनुभव ने हमे बेहतर प्रदर्शन करने, निरंतर सुधार करते जाने और अपने लिए उपलब्धियों के नए मापदंड निर्धारित करने के लिए उद्वेलित किया।“

सीबीसी के कड़े और व्यापक मानदंडों ने हमें अपने प्रत्येक छोटे-से-छोटे कार्य का भी मूल्यांकन करने – चुनौतियों को समझने, प्रक्रियागत सुदृढ़ीकरण और लगातार सुधारात्मक कार्रवाई करते जाने एवं मानक संचालन प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए अभिप्रेरित किया। इससे हमारे प्रदर्शन में कई गुना सुधार हुआ।

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संस्कृति निर्माण में हमारा योगदान: नेतृत्व के सबक

संस्कृति निर्माण में हमारा योगदान: नेतृत्व के सबक

डॉ. अंजु राठी राणा

सदस्य सचिव, भारतीय विधि आयोग,
विधि एवं न्याय मंत्रालय

मिशन कर्मयोगी संकल्पना की सर्वप्रथम जब मुझे जानकारी मिली तब सुधार का विचार मुझे नहीं सूझा। मैंने सुशासन को मन ही मन सेवा-कार्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का एक अवसर माना। मैंने इसे सम्मान या पुरस्कार प्राप्त करने का साधन नहीं समझा बल्कि अपने कार्य को निष्ठापूर्वक निष्पादित करने से मिलने वाली सर्वोच्च संतुष्टि के रूप में स्वीकार किया।

इस मिशन का ध्येय वास्तव में इस परिवर्तनकारी सत्य से साक्षात्कार कराना है कि हमारी प्रशासनिक व्यवस्था का सामर्थ्य उसके नियम नहीं बल्कि उसके कार्मिक हैं। क्षमता विकास को मैंने कभी कार्यालयीन कार्य की पूर्ति मात्र नहीं माना बल्कि संस्कृति विकास का एक परम अवसर माना। मैं एक ऐसा कार्य-स्थल बनाना चाहती हूँ जिसमें सीखना उतना ही स्वाभाविक है जितना बात करना। लंच टेबल पर एक दूसरे से मिलने के लिए हम जैसे उत्सुक रहते हैं वैसे ही एक दूसरे से सीखते भी हैं। प्रत्येक भूमिका, प्रत्येक सुधार के प्रति जिज्ञासा; जन सेवा और विकसित भारत@2047 के बृहत् उद्देश्य की प्राप्ति के लिए होनी चाहिए।

“हम प्राय: प्रयास करने से पहले पुरस्कार चाहते हैं और हमारी सोच यही रहती है कि ’मुझे क्या मिलेगा?’ परंतु यह सत्य भी अटल है कि – काम करोगे, तब अपने आप मिल जाएगा। अपने कर्तव्य को निष्ठा के साथ निभाने से पुरस्कार-प्राप्ति भी अटल है। वास्तविक पहचान दी नहीं जाती बल्कि ईमानदारी से योगदान करके सेवा-संतुष्टि का मीठा फल अर्जित किया जा सकता है।”

विधिक कार्य विभाग के सचिव के अपने कार्यकाल में मैंने राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम के फेज़-I और फेज़-II 20 बैचों में 100% की सर्वोच्च उपस्थिति के साथ सफलतापूर्वक पूरे कराए जो क्षमता विकास की हमारी यात्रा में अब तक का एक बड़ा मील पत्थर है। प्रत्येक अधिकारी, कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारी और हमारे एमटीएस के सहकर्मी साथ-साथ इस कार्यक्रम में शामिल हुए क्योंकि इसमें सीखने की दृष्टि से न कोई कनिष्ठ और न ही सुनने में कोई वरिष्ठ था।

हमने सीखा कि प्रगति के लिए सदैव केवल कागजी कार्रवाई आवश्यक नहीं होती और पद केवल संस्कृति विकसित नहीं कर सकते। विधिक कार्य विभाग में हर सप्ताह मैं ग्रुप हैड्स के साथ चल रहे कार्यों की स्थिति जानने के लिए चाय पर अनौपचारिक चर्चा आयोजित करती थी। ये सरल, मानवीय प्रयास थे और इनके परिणाम आश्चर्यचकित कर देने वाले रहे। विभिन्न विषयों पर खुले मन से विचार-विनिमय होता था। इसमें पदों को कोई प्रमुखता नहीं मिलती। प्रमुखता मिलती थी तो भविष्य की अंतर्दृष्टि को।

हमारे विभागीय संस्कृति में सुधार लाने में हर महीने होने वाली टिफिन बैठक भी काफी महत्वपूर्ण रहीं। ये बैठकें हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अभिप्रेरणा का ही सुफल थी। यह बैठक आरंभ में विधि सचिव के साथ अनौपचारिक रूप से लंच के समय में होती थी जो बाद में एक दूसरे से सीखने और मिलकर समस्या का समाधान करने का एक प्रभावी मंच बन गई। एक दूसरे के साथ भोजन साझा करने के साथ-साथ अधिकारियों द्वारा चुनौतियों पर चर्चा, विचार-विनिमय और समस्या-समाधान का एक सशक्त माध्यम बन गई थी जो औपचारिक बैठकों में शायद संभव नहीं हो सकता था।

“हमारे विभाग में सीखना स्वैच्छिक था न कि किसी नियम वश। हमने सभी स्तरों के अधिकारियों की उपलब्धियों को आईगोट प्लेटफॉर्म पर सम्मानित करने की शुरुआत कराई, यह किसी समारोह का हिस्सा नहीं थीं बल्कि व्यक्तिगत स्वीकृति और संवाद के तौर पर प्रस्तुत की जाती थीं। इनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि जब कोई अधिकारी कोर्स पूरा करने के पश्चात् यह कहता कि ’मैडम, अब मुझे समझ आया कि हम क्या कर रहे हैं’ – उनके काम और सुशासन के बृहत् उद्देश्य की भावना को समझाने में सफलता ही मिशन कर्मयोगी की सच्ची जीत है।”

अपने कार्यकाल के दौरान, मैंने विभाग के परिसर में कुछ छोटे किंतु सार्थक ढांचागत परिवर्तन भी किए। बैठक-कक्ष का नाम बदलकर उसे “कर्मयोगी सभागार” का नया नाम दिया गया। प्रशासनिक अनुभागों को माननीय प्रधानमंत्री के चार संकल्प मूल्यों - एकता, विकास, गर्व और कर्तव्य की प्रेरणा से नया नामकरण किया गया। ये केवल साइनबोर्ड मात्र नहीं थे बल्कि इस बात को रोजाना दोहराना था कि हम क्या हैं और हमारी सेवा के क्या मायने हैं।

मेरा मानना है कि क्षमता विकास केवल एक कैलेंडर कार्यक्रम ही नहीं है अपितु एक रिले दौड़ है। इसमें हममें से प्रत्येक को अपने हिस्से की दौड़ पूरी करनी है पर यह भी याद रखना है कि यह बैटन केवल कुछ समय के लिए ही हमारे पास है और इस दौरान हम कितना निष्ठा के साथ दौड़ते हैं वही यह तय करेगा कि हम अपने अगले साथी को क्या सौंप रहे हैं। हमारे पास जो बैटन है वह हमारी जिम्मेदारी मात्र नहीं है बल्कि यह सेवा - भाव है।

हम भविष्य की ओर देखें तो हमारा लक्ष्य अपने कार्यालयों को केवल कार्य-स्थल मात्र नहीं रहने देना है बल्कि इन्हें नवोन्मेषन, परानुभूति और उत्कृष्टता का जीता - जागता क्लासरूम बना देना है जिसमें ज्ञान का खुले मन से प्रसार हो, जिज्ञासा का उत्साहवर्धन हो, प्रतिक्रया का स्वागत हो और लोक - सेवक के रूप में संतुष्टि सफलता का सर्वोच्च मापदंड हो।

मेरे लिए सुधार का सच्चा अर्थ है:
परिवर्तन का शोर नहीं, मूक दूरगामी परिवर्तन।
केवल अनुपालन नहीं, दृढ़-विश्वास।
सम्मान नहीं, संतुष्टि।

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RAKNPA – हमारी मानकीकरण यात्रा

RAKNPA – हमारी मानकीकरण यात्रा

सुश्री प्रतिभा नाथ

निदेशक, RAKNPA

रफ़ी अहमद किदवई नेशनल पोस्टल एकेडमी (RAKNPA) सविनय एवं सहर्ष सूचित करती है कि हम सर्वप्रथम केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान (CTI) हैं जिसे क्षमता विकास आयोग (CBC) द्वारा मानकीकरण की प्रतिष्ठित 5-स्टार रेटिंग प्राप्त हुई है।

हमारी इस परिवर्तनकारी यात्रा का शुभारंभ जून 2023 में हुआ जब हमारी एकेडमी को 2-स्टार रेटिंग प्राप्त हुई थी। आरंभ से ही सुधार की आवश्यकता अनुभव करते हुए हमने मिशन कर्मयोगी के विजन अनुसार प्रयास प्रारंभ दिए थे। सीबीसी टीम सतत एवं सुधीर मार्गदर्शन के लिए हमारे साथ बनी रही जिसका सुफल है कि हम अपनी कार्य-प्रणालियों एवं प्रशिक्षण व्यवस्था में सुधार ला पाए।

मानकीकरण की संपूर्ण प्रक्रिया ने हमारे रूपांतरण का पथ-प्रशस्त किया और हम राष्ट्रीय सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्था मानकों (NSCSTI) के सभी आठ स्तंभों पर सफलता की नई परिभाषा गढ़ पाए। हमने प्रशिक्षण आवश्यकता आकलन, संकाय विकास और डिजिटलीकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जिससे हम अपनी कार्य-विधियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाकर प्रशिक्षण प्रक्रियाओं का सरलीकरण करने में सफल रहे।

प्रमुख प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियों का प्रत्यायोजन करके हमने सांस्थानिक दक्षता अर्जित की और अधिक प्रभावी प्रशिक्षण-तंत्र विकसित किया। प्रभावपूर्ण गुणवत्ता उन्नयन, डिजिटलीकृत क्लास रूम, सर्वतोमुखी प्रशिक्षण प्रबंधन व्यवस्था, कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब एवं वर्चुअल इमर्सिव लर्निंग लैब के चलते हमारी प्रशिक्षण-विषयवस्तु और प्रशिक्षण-प्रदायगी निरंतर समृद्ध होती गई।

इसके अतिरिक्त, भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ जुड़ने से हम अपने प्रशिक्षण परिवेश को संस्कृति-संपन्न व नैतिक दृष्टिकोण-युक्त, भारत की समृद्ध सभ्यता पर आधारित धरातल देने में समर्थ हुए। सीबीसी मानकीकरण मात्र मूल्यांकन नहीं है – यह सतत सुधार का सुफल भी है। एकेडमी (RAKNPA) हमारे महान राष्ट्र को समर्थ, सदाचारी और भविष्योन्मुखी सिविल सेवक देने के लिए संकल्पबद्ध है।

 कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 

6 मार्च 2024 को अपनी स्थापना के बाद से ई-कॉन्टेन्ट डेवल्पमेंट के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाला एक विशिष्ट नवोन्मेषी प्लेटफॉर्म रहा है।

आधुनिकतम प्रौद्योगिकी से उत्तरोत्तर सुसज्जित यह प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (मिशन कर्मयोगी) के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए समर्पित है।

लाइव वीडियो रिकॉर्ड करने के लैब के सामर्थ्य के बल पर एकेडमी ई-लर्निंग कॉन्टेन्ट डिजाइनिंग में समृद्ध बनती जा रही है। लैब की इस अद्भुत क्षमता से अकादमी दक्ष और प्रभावपूर्ण उच्च-गुणवत्ता वाली एवं उपयोगी प्रशिक्षण-सामग्री तैयार कर रही है।

यह हिंदी और अंग्रेजी में 100 से अधिक महत्वपूर्ण कोर्स विकसित कर चुकी है। इनमें पोस्ट ऑफिस एक्ट, 2023, अपने मंत्रालय – डाक विभाग को जानें, डाक सेवाओं में लाभ-केंद्रितता जैसे विशिष्ट पाठ्यक्रम शामिल हैं।

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